वैक्सीन से कैसा भय

– अनिल चतुर्वेदी –

मानना पड़ेगा कि कोरोना से निजात पाने में भारत के प्रयास काफी प्रभावी साबित हो रहे हैं। हमने इस वायरस को पश्चिमी देशों की भांति बेकाबू नहीं होने दिया। अब इसके खत्मे के लिए असरकारी वैक्सीन तैयार कर ली है। कामना यही है कि वैक्सीन ऐसा असर दिखाए कि कोरोना भाग छूटे, हमेशा के लिए।

लोगों को वैक्सीन लगाने का व्यापक अभियान शुरू कर दिया गया है। लेकिन कोरोना वायरस का खौफ देशवासियों के दिमाग में इस कदर छाया हुआ है कि वे टीकाकरण से दूर भाग रहे हैं। इस खौफ की अहम वजह चिकित्सा क्षेत्र पर हावी व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा है। पहले से ही डरे-सहमे लोगों को, दवा कंपनियों की गला-काट प्रतिस्पर्धा के चलते वैक्सीन के बारे में मिल रही निगेटिव सूचनाएं और भयभीत कर रही हैं। एक तरफ सरकार हालात सामान्य बनाने में जुटी है, वहीं दवा कंपनियां रायता फैलाने में लगी हैं।

यह सही है कि देश आर्थिक मोर्चे पर करवट ले रहा है। अनलॉक के बाद से काम-धंधों ने जिस तरह रफ्तार पकड़ी है, उसी का नतीजा है कि दो महीनों (दिसम्बर-जनवरी) में रिकॉर्ड जीएसटी संग्रहण हुआ है। इसी के साथ कोरोना संक्रमितों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई है। संक्रमितों का ग्राफ लगातार नीचे की ओऱ जा रहा है। इस संदर्भ में कुछ डाक्टरों का मत गौरतलब है कि अन्य वायरसों की तरह कोरोना वायरस का प्रकोप भी चरम तक पहुंचने के बाद स्वत: गायब हो सकता है। यह स्थिति मात्र 35 फीसदी आबादी के वैक्सीन से सुधार होने पर ही बन सकती है।

अगर विशेषज्ञ डाक्टरों के इस मत को मान लिया जाए तो कोरोना संकट दूर करने में वैक्सीन अहम भूमिका निभाने वाली है। मतलब, कोरोना उतार पर है और वैक्सीन उससे पूरी तरह निजात दिलाने जा रही है। जहां तक वैक्सीन के साइड इफैक्ट का सवाल है तो डॉक्टरों का मानना है कि भारत में जिन दो वैक्सीनों—कोवैक्सीन तथा कोविशील्ड, के लगाने की शुरुआत हुई है, उनका असर भी अन्य टीकों के समान है। अभी तक जिन लाखों स्वास्थकर्मियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है, उनमें एक फीसदी से भी कम लोगों को साइड इफैक्ट हुआ है। कुछेक की मौत भी दर्ज की गई है, लेकिन डॉक्टरों ने मौत की वजह वैक्सीन को नहीं माना है। मृतकों को अन्य बीमारी होना बताया जा रहा है। वैक्सीन के प्रभावकारी होने के प्रमाण सामने आने के बावजूद लोगों में भय होना चिंताजनक है। ऐसे में उनका ‘वेट एंड वॉच’ अपनाना स्वाभाविक लगता है। हालांकि देशभर के बड़े डॉक्टर खुद वैक्सीन लगवाकर इसके पूरी तरह सुरक्षित होने का लगातार संदेश दे रहे हैं। इसी तरह आमजन के आदर्श माने वाले नेतागण और फिल्मजगत के बड़े नाम भी टीकाकरण कराते हैं तो उसका भी लोगों पर मनोवैज्ञानिक असर होगा। इसबीच सरकार को भी वैक्सीनों की भरमार से बचने तथा इनके दाम काबू में रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। फिलहाल दो ही वैक्सीनों पर जोर देकर एकबार तो कोरोना की आफत दूर होने दी जाए, फिर भले ही बाजार में विभिन्न कंपनियों की वैक्सीन आने दी जाएं।

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