थमे नहीं राज्यपाल के बयानी धमाके

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक इन दिनों अपने बयानी धमाकों से प्रधानमंत्री, भाजपा, आरएसएस सभी के पसीने छुटा रहे हैं। उनके एक से बढकर एक खुलासे सीयासी खलबली मचाए हुए हैं।  

राज्यपाल मलिक ने मोदी सरकार के स्‍टैंड से उलट पहले तीन केंद्रीय कृषि कानूनों की वापसी का भी समर्थन किया, फिर जम्मू-कश्मीर में अंबानी व संघ पदाधिकारी की दो डील का खुलासा किया और अब गोवा में भ्रष्टचार को लेकर मुखर हैं। इस दौरान वह भाजपा से लेकर आरएसएस तक के नेताओं को निशाने पर ले रहे हैं। हाल ही में उन्होंने इंडिया टुडे तथा भास्कर को इंटरव्यू दिए हैं। एक इंटरव्यू में गोवा में भ्रष्टाचार समेत कश्मीर डील व किसान आंदोलन पर बेबाकी से अपनी बात रखी, जबकि दूसरे में आरएसएस का नाम लेने पर माफी मांगी।

इंटरव्यू में राज्यपाल मलिक ने, हालांकि, कश्मीर डील तथा गोवा के भ्रष्टाचार की बात करते समय प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार के खिलाफ बताने की लाख कोशिश की, लेकिन जिस तरह उन्हें बीच टर्म में कश्मीर से हटाकर गोवा औऱ फिर मेघालय भेजा गया, उसने पीएम की निष्ठा पर भी सवाल खड़े कर दिए।

राज्यपाल मलिक ने कहा कि गोवा में बहुत भ्रष्टाचार है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पर ध्यान देना चाहिए। गोवा मेंभाजपा सरकार कोविड से ठीक तरह से नहीं निपट पाई और मैं अपने इस बयान पर कायम हूं। गोवा सरकार ने जो कुछ भी किया, उसमें भ्रष्टाचार था। गोवा सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से मुझे हटा दिया गया। मैं लोहियावादी हूं, मैंने चरण सिंह के साथ वक्त बिताया है। मैं भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, गोवा सरकार की घर-घर राशन बांटने की योजना अव्यवहारिक थी। ये एक कंपनी के कहने पर किया गया था, जिसने सरकार को पैसे दिए थे। मुझसे कांग्रेस समेत कई लोगों ने जांच करने को कहा था। मामले की जांच की और प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गोवा सरकार मौजूदा राज्यभवन को ढहाकर नया भवन बनाना चाहती थी, लेकिन इसकी कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने बताया कि ये तब प्रस्तावित किया गया था, जब सरकार वित्तीय दबाव में थी।

सत्यपाल मलिक ने कुछ दिनों पहले कहा था कि जब वे जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल बने, तब उनके पास दो फाइलें आई थीं। एक फाइल में अंबानी शामिल थे, जबकि दूसरी फाइल में आरएसएस के एक बड़े अफसर और महबूबा सरकार में मंत्री से जुड़ी थी। ये नेता खुद को पीएम मोदी के करीबी बताते थे। राज्यपाल ने कहा था कि जिन विभागों की ये फाइलें थीं, उनके सचिवों ने उन्हें बताया था कि इन फाइलों में घपला है। सचिवों ने उन्हें यह भी बताया कि इन दोनों फाइलों में उन्हें 150-150 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। लेकिन, उन्होंने इन दोनों फाइलों से जुड़ी डील को रद्द कर दिया था। एक फाइल इंश्योरेंस कंपनी की थी, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के इंश्योरेंस का मामला था और दूसरी फाइल पावर सेक्टर की थी।

मलिक के इन आरोपों के बीच भाजपा नेता राम माधन ने पत्रकारों से कहा कि सत्यपाल मलिक जब तक जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल रहे, तब तक हुए सभी समझौतों की फ़ाइल्स की जांच होनी चाहिए। मलिक ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा है कि जम्मू-कश्मीर में एक फाइल में मेरा नाम था और इस बारे में पैसे देने का भी जिक्र था। इस तरह के आरोप झूठे हैं। मेरा नाम या मेरे कहने पर किसी तरह की फाइल का सवाल ही नहीं उठता।

राज्यपाल मलिक ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रीय स्वयं संघ (आरएसएस) से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहने के दौरान 300 करोड़ रुपए की रिश्वत ऑफर किए जाने के मामले का संघ से कोई मतलब नहीं। उनसे गलती हो गई और वे माफी चाहते हैं। मलिक ने किसानों को एमएसपी की गारंटी देने की पैरवी करते हुए दावा किया कि किसान आंदोलन का उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर मामूली असर पड़ेगा, लेकिन लोकसभा चुनाव में इसका बहुत गहरा असर होगा।

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