बाल सदन-सियासी जागरूक दिखे बच्चे

विधानसभा के इतिहास में रविवार को पहली बार बाल सत्र हुआ। इसमें देश-प्रदेश से 200 बच्चों ने विधायक और मंत्रियों की भूमिका निभाई। बच्चों को मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री और विधायक बनाकर सदन की कुर्सियों पर बिठाया गया। बच्चों के बैठने की व्यवस्था भी उसी हिसाब से की गई। खास बात ये रही कि सदन की कार्यवाही के दौरान वो सब दिखाई दिया जो बड़े सदस्य करते हैं। मंत्री के जवाब पर असंतोष, हंगामा, नारेबाजी औऱ वॉकआफट सभी कुछ बाल नेताओं ने भी किया। अध्यक्ष बनी जयपुर की बच्ची जान्ह्वी शर्मा को सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी।   

बाल सत्र के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सवाल उठाने से सरकारें जवाबदेह होंगी और शासन में पारदर्शिता आएगी। यह विधानसभाओं और संसद से ही संभव है। उन्होंने कहा कि कानून बनाते समय जनता की सक्रिय भागीदारी होगी, तो कानून ठीक बनेंगे और लागू होंगे। हमारे लिए यह चिंता की बात है कि संसद और विधानसभा में कानून बनाने से पहले बहस का समय घटता जा रहा है। विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि हमें बच्चों के मन की बात सुनकर उसके हिसाब से नीतियां बनाने पर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों से पूछा जाना चाहिए कि वो किस तरह की सरकार चाहते हैं। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि बच्चों ने हमसे अच्छे अनुशासन में सदन चलाया है, हम तो सदन की कार्यवाही को डिस्टर्ब करते रहते हैं। सच्चाई को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। देश के 15 राज्यों से बच्चों को बुलाकर बाल सत्र आयोजित कर अध्यक्ष ने इतिहास बनाया है।

विधानसभा के बाल सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही चली। प्रश्नकाल के दौरान मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े सवाल पर गृहमंत्री के जवाब से असंतुष्ट बच्चों ने हंगामा किया और वेल में आकर धरना दिया और नारेबाजी की। कुछ समय बाद हंगामा शांत हुआ। शून्यकाल में नेटबंदी और नौजवानों के रोजगार से जुड़े मुद्दे उठे, नौजवानों से जुड़े मुद्दों पर सदन से वॉकआउट भी हुआ।

बच्चों ने विधायकों की तरह जनता से जुड़े असली सवाल पूछे जो विधानसभा के प्रश्नकाल में पूछे जाते हैं। सवालों का मंत्री बने बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास से जवाब दिया। विधायक की भूमिका में ललिता बाबल ने प्रदेश में बाल विवाह से जुड़ा सवाल उठाते हुए तीन साल में बाल विवाह का ब्यौरा मांगा और रोकथाम नहीं होने पर सवाल उठाए। इस पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री बने दिनेश बेरड़ ने जवाब में कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए समाज में जागरूकता फैलाई जा रही है। जिलों के अफसरों को बाल विवाह रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर रखे हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि सरकार की जागरूकता के बाद भी बाल विवाह तो हो रहे हैं। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि शिक्षा के अभाव में ऐसा हो रहा है।

प्रश्नकाल में बच्चों ने महंगाई और मादक पदाथों की तस्करी से जुड़े सवाल पूछे। गृह मंत्री की भूमिका निभा रहे प्रतीक शर्मा ने जवाब में कहा कि प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के 5782 प्रकरण दर्ज किए गए। इन प्रकरणों में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। दर्ज प्रकरणों की वृद्धि का तस्करी बढ़ने से कोई संबंध नहीं है। भीड़भाड़ वाले स्थानों, शिक्षण संस्थानों के आसपास ड्रग माफियाओं को चिन्हित कर प्रभावी कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्पेशल टीमों का गठन किया जा चुका है। इस जवाब से असंतुष्ट विधायकों का रोल कर रहे बच्चों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अफसर गलत जानकारी दे रहे हैं। जवाब सही नहीं है।

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