गंदे पानी से बदला नदियों का रंग, जिम्मेवारों पर जुर्माना

राजस्थान की नदियों ने अपना रंग बदल लिया है। अब यहां की नदियों का पानी लाल और काले रंग का दिखने लगा है। यह सब नदियों में छोड़े जाने वाले उद्योगों के गंदे पानी से हुआ है।

जोधपुर और पाली में स्थित जोजरी, लूणी और बांडी नदियों का पानी लाल-काला हो रहा है। नदियों का पानी खेतों में जाने से जमीन बंजर हो रही है। परेशान लोगों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) में याचिका दायर की। एनजीटीने जोधपुर व बाड़मेर रीको सहित लोकल बॉडीज पर दो-दो करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।

याचिका दायर करने वाले जयदीप सिंह ने बताया कि ट्रीटमेंट प्लांट से पानी ट्रीट हुए बगैर नदियों में छोड़ा जा रहा है। साल 2014 ने याचिका लगाई थी। इस पर अब 1 अप्रैल को फैसला सुनाया गया। एनजीटीने आदेश में कहा- पॉल्यूशन फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर बड़ा जुर्माना लगाया जाए। इसके बाद भी नहीं माने तो ऐसी फैक्ट्रियों को बंद किया जाए।

एनजीटीकी न्यायाधीश आदर्श गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजस्थान राज्य प्रदूषण निवारण मंडल को निर्देश दिया कि वह मॉनिटरिंग करें कि किसी भी तरह के ट्रीटमेंट प्लांट से पानी ट्रीट हुए बगैर नदी में नहीं छोड़ा जाए। यदि कोई सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट व कॉमन एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट से पूरी तरह से ट्रीट किए बगैर पानी को डिस्चार्ज किया जाता है तो उसे सीज कर दिया जाए।

एनजीटीने जोधपुर व बाड़मेर के जिला कलेक्टर को आदेश दिया कि वे एक सर्वे करवा कर रिपोर्ट तैयार करे कि कौन सी इंडस्ट्री से कितना केमिकल युक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके लिए पॉल्यूशन बोर्ड व सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की एक टीम इस पर लगातार निगाह रखे। नियमों की अवहेलना करने वाली इंडस्ट्री पर भारी जुर्माना लगाया जाए। इसके बावजूद भी यदि नियमों की पालना नहीं की जाती है तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए।

जोधपुर की इंडस्ट्रीज से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को जोजरी नदी में छोड़ा जाता है। यह पानी अराबा के समीप पहुंच खेतों में फैल जाता है। इस कारण से लोगों के खेतों की जमीन पूरी तरह से बंजर हो चुकी है। भूजल भी प्रदूषित हो चुका है। बाड़मेर जिले के बालोतरा व पाली शहर में रंगाई-छपाई की इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी लूणी व बांडी नदी में छोड़ा जाता है।

ग्राम पंचायत अराबा की ओर से 2014 में नदियों को प्रदूषित करने का मामला उठाते हुए एनजीटीमें याचिका लगाई थी। इस पर नई दिल्ली की एनजीटीबेंच ने 25 फरवरी 2022 को फैसला सुरक्षित रखा था। अराबा ग्राम पंचायत ने याचिका में भारत सरकार, राजस्थान सरकार, बाड़मेर कलेक्टर, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बाड़मेर व जोधपुर, रीको व बालोतरा जल प्रदूषण नियंत्रण व रिसर्च ट्रस्ट, जसोल वॉटर ट्रीटमेंट ट्रस्ट, बालोतरा स्थानीय प्रशासन व केंद्रीय भूजल अथॉरिटी को पक्ष बनाया गया था। हाल में ही एनजीटीकी ओर से जारी आदेश में जोधपुर-बाड़मेर प्रशासन व रीको पर 2-2 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही जिम्मेदार अथॉरिटीज को 30 सितंबर 2022 तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। ये भी कहा है कि जो डैमेज हुआ है, उसके लिए 2 महीने में प्लान बनाएं और 6 महीने में उसे लागू करें। साथ ही एक कमेटी बनाकर प्रभावित इलाकों का सर्वे करने के आदेश है। लोकल बॉडीज व अथॉरिटी पर जो जुर्माना लगाया गया है उसे 15 दिन में भरने के आदेश है। ऐसा नहीं होने पर दोबारा नए सिरे से जुर्माना लगाने की बात कही गई है।

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