घनकड़ के गांव में घऱ-घर मिठाई, मंगल गीत

जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राजस्थान में चिड़ावा से करीब सत्रह किलोमीटर दूर स्थित किठाना गांव में उत्सव सा माहौल है। धनखड़ का जन्म किठाना गांव में 18 मई 1951 को गोकुलराम धनखड़ के घर हुआ। गांव के चौक में उनकी पुश्तैनी हवेली भी है। धनखड़ की प्रारंभिक शिक्षा भी इसी गांव के सरकारी स्कूल में हुई। उन्होंने गांव के चौक के पास स्थित सरकारी स्कूल से पांचवीं तक पढ़ाई की। इसके बाद नजदीकी गांव घरड़ाना से आठवीं पास की। ग्रामीण और बचपन के दोस्त बताते हैं कि घरड़ाना स्कूल तक साधन नहीं होने के कारण वे पैदल ही जाते थे।

एनडीए की ओर से उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की सूचना मिलने के साथ ही गांव में खुशी का माहौल है। हर घर में मिठाई बांटी जा रही है। महिलाएं मंगल गीत गा रही है। चारों तरफ पटाखे छोड़े जा रहे हैं और पैतृक घर में देसी घी के दीपक जलाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे धनखड़ ने उच्च शिक्षा राजस्थान विश्वविद्यालय से पूरी की। राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद वे वकालत करने लगे। राजस्थान हाईकोर्ट में वर्षों तक वकालत की तथा 1986 में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे। शेखावाटी से भैरोंसिंह शेखावत भी उप राष्ट्रपति रह चुके हैं।

एनडीए के उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार धनखड़ ने विभिन्न सामाजिक संगठनों और ट्रस्टों से जुड़कर समाज सेवा की। राजस्थान ओलम्पिक एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके है। जाटों को ओबीसी दर्जा दिलाने के लिए धनखड़ ने काफी प्रयास किए। उन्होंने राजनीति में लंबी पारी खेली है। वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने झुंझुनूं से अपना प्रत्याशी उतारने की बजाय गठबंधन के तहत जनता दल प्रत्याशी जगदीप धनखड़ को समर्थन दिया।

धनखड़ तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर आते हैं। उनके बड़े भाई कुलदीप धनखड़ कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते हैं। दूसरे नंबर पर स्वयं जगदीप तथा सबसे छोटे भाई रणदीप धनखड़ हैं, जो आरटीडीसी चेयरमैन रह चुके हैं।

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