नोटबंदी का जिन्न फिर जागा, केन्द्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 2016 में नोटबंदी के दौरान 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाले सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। 5 जजों के संविधान पीठ ने केंद्र और रिजर्व बैंक से नोटबंदी से फैसले पर जवाब मांगा गया है। जानकारों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने विचार किया है कि क्या विमुद्रीकरण का मुद्दा अकादमिक है। केंद्र और आरबीआई ने हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 नवंबर को होगी।

अदालत ने केंद्र और रिजर्व बैंक से 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले पर व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा है। पीठ ने केंद्र के 7 नवंबर 2016 के रिजर्व बैंक को लिखे पत्र, अगले दिन नोटबंदी के फैसले से संबंधित फाइलें तैयार रखने को कहा है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस एएश बोपन्ना, जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ कर रही है। यह संविधान पीठ 58 चुनौती याचिकाओं की सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पांच जजों की एक और संविधान पीठ का गठन किया था, जो पांच महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेगी। इनमें नोटबंदी के फैसले को चुनौती संबंधी याचिकाएं भी शामिल हैं।  16 दिसंबर, 2016 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार के निर्णय की वैधता और अन्य प्रश्नों को पांच न्यायाधीशों की एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया था।

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