युवाओं के सुझाव मान सकेगी सरकार?

राजस्थान के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब बजट के लिए युवाओं से सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए बाकायदा ऑनलाइन पोर्टल खोला गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने युवाओं से कहा था कि आप सुझाव भेजिए, इन्हें अगले बजट में शामिल किया जाएगा। बता दें कि इसबार का बजट युवाओं को समर्पित रहेगा।

मुख्यमंत्री की अपील पर महज 10 दिन में ही इस पोर्टल पर करीब 1 लाख सुझाव आ गए। इनमें ज्यादातर सुझाव रोजगार, बेरोजगारी भत्ता, नौकरी, पद, आरक्षण नियम, भर्ती, बैकलॉग, कंप्टीशन परीक्षा, रिजल्ट आदि से संबंधित हैं। कुछ सुझाव ऐसे हैं, जिनको सरकार द्वारा माना जाना मुश्किल नहीं, नामुमकिन लगता है। ये सुझाव हैं—सरकारी नौकरी का फॉर्म भरने की कोई फीस नहीं लगनी चाहिए। अगर पेपर लीक हो जाए तो बोर्ड उसका मुआवजा छात्रों को दे। इंजीनियरिंग-एमबीए-बीएड कर चुके बेरोजगारों को जीरो इंटरेस्ट पर लोन मिले। किसी को चाय की थड़ी, कचौरी का ठेला लगाना हो तो इसके लिए अलग से बजट होने चाहिए। बेरोजगारी भत्ता 3 हजार से बढ़ाकर 5 हजार रुपए किया जाना चाहिए।

मुसीबत यह है कि जो सुझाव आ रहे हैं, उन्हें देखना, छंटनी करना और बजट में शामिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इन सुझावों को कैसे और किस ढंग से बजट में शामिल किया जाएगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। हालांकि, वित्त विभाग के निदेशक (बजट) बृजेश किशोर शर्मा कहते हैं कि हमारे पास सुझावों को अंतिम छोर तक पहुंचाने का सिस्टम है। हम तेजी से सुझावों को अलग-अलग कैटेगरी में छंटनी करने में जुटे हैं। बजट में युवाओं पर खास फोकस की बात सीएम गहलोत ने कही है, जिसका पूरा पालन हो रहा है।

यह पोर्टल 31 दिसंबर तक खुला है। अनुमान है कि 3 लाख से ज्यादा सुझाव वित्त विभाग को मिल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार सबसे बेहतरीन 1000 सुझाव बजट तैयार करने वाली कमेटी के पास जाएंगे। जिन्हें प्रदेश के वित्त मंत्री की हैसियत से खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देखेंगे। इनमें से सबसे दमदार सुझावों को बजट में जगह दी जा सकती है।

युवाओं को समर्पित होने वाले आगामी बजट में जो प्रावधान होने हैं, उनका एक करोड़ नौजवान इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि युवाओं द्वारा अबतक सरकार को लगभग एक लाख सुझाव भेज चुके हैं।

अबतक आए सुझाव

बार-बार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए कोई फुल प्रूफ सिस्टम बने।

….आरपीएससी और कर्मचारी चयन आयोग को केंद्र के यूपीएससी और एसएससी की तर्ज पर विकसित किया जाए, जहां भर्ती परीक्षा की तारीख, कैलेंडर, रिजल्ट सब कुछ व्यवस्थित हो। अगले तीन साल में कौन-कौन सी परीक्षाएं कब आयोजित होंगी, सब तय होनी चाहिए।

….प्रतियोगी परीक्षाओं को बंद कर स्कूल-कॉलेज व संबंधित डिग्री-डिप्लोमा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाई जाए। इससे पेपर आउट होने, नकल और बेईमानी की संभावना लगभग समाप्त हो सकेंगी।

…बेरोजगारी भत्ता 3 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार रुपए मासिक किया जाए। पिछले चुनावों (2018) में भाजपा ने बेरोजगार भत्ता 5 हजार रुपए मासिक देने का वादा किया था।

…किसी भी विभाग में किसी भी रैंक पर कार्यरत प्रत्येक संविदाकर्मी को नियमित किया जाए।

…युवाओं को उनकी डिग्री जैसे इंजीनियरिंग, बीएड, होटल मैनेजमेंट, एमबीए के आधार पर बिजनेस शुरू करने के लिए सरकार की ओर से शून्य ब्याज दर पर लोन दिया जाना चाहिए।

….छोटे बिजनेस जैसे- चाय की दुकान, कचौरी का ठेला, पोहे का ठेला, हेयर कटिंग की दुकान, कृषि कार्य, पशुपालन, दूध उत्पादन के लिए सरकार आर्थिक मदद करे। इसमें पढ़े-लिखे, उच्च शिक्षित युवाओं को प्राथमिकता मिले।

….प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए कोई फीस नहीं ली जाए। पूरा भुगतान सरकार अपने बजट से करे।

….युवाओं को अंग्रेजी बोलना सिखाने के लिए सरकार स्कूल या कॉलेज स्तर पर ही व्यवस्था करे।

….सरकारी नौकरी के लिए कभी भी आवेदन न करने की शर्त के साथ युवाओं को अपना स्टार्टअप या बिजनेस शुरू करने के लिए बिना ब्याज के मदद मिले।

….पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने पर छात्रों को होने वाले नुकसान का संबंधित बोर्ड से मुआवजा मिले।

….सरकारी नौकरी में रिटायरमेंट की उम्र घटाई जानी चाहिए, ताकि ज्यादा युवाओं को मौका मिल सके।

….छोटे स्तर पर खेती, बागवानी, नर्सरी आदि कामकाज के लिए युवाओं को मुफ्त ट्रेनिंग और लोन की व्यवस्था हो।

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