नेता करा रहे कथाएं, दलित पूजा से वंचित

मध्य प्रदेश में एक ओऱ राजनीति का भक्ति काल चल रहा है, वहीं दूसरी ओर दलितों को भगवान की पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है।

प्रदेश के खरगोन जिले के सनावद और कसरावद में महाशिवरात्रि पर गांव के रसूखदारों ने कथित तौर पर दलित समाज की महिलाओं को शिव मंदिर में पूजा करने से रोक दिया। इसको लेकर दो पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 14 लोग घायल हो गए।

मध्यप्रदेश में इसी साल नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही बाबाओं के दरबार के दरबार सजने लगे हैं। नेताओं की उनसे नजदीकियां बढ़ीं हैं। अपने-अपने इलाकों में मंत्री से लेकर विधायक तक बाबाओं की कथाओं के जरिए वोटरों को साधने में लगे हैं। शिवराज सरकार के कई मंत्री अपने-अपने क्षेत्र में कथा करा चुके हैं। केवल भाजपा ही धार्मिक आयोजन कर राजनीतिक पुण्य प्राप्ति का जतन कर रही है, कांग्रेस के बड़े नेता भी बाबाओं की कथा से राजनीतिक प्रसाद हासिल करने में लगे हैं।

प्रदेश में बीते 6 महीने में 500 से अधिक धार्मिक कथाओं का आयोजन हो चुका है। इनमें से अधिकांश कथाएं नेताओं द्वारा आयोजित कराई गई हैं। इसमें तीन कथावाचकों बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, कुबेरेश्वर धाम के प्रदीप मिश्रा और पंडोखर सरकार गुरुशरण शर्मा का प्रदेश की 230 में से 153 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। यही वजह है कि अधिकांश मंत्री और विधायक इन बाबाओं के दरबार में शरणागत हैं। साथ ही जया किशोरी की कथा सुनने वालों की तादाद भी लगातार बढ़ती जा रही है। 

उधर, सनावद तहसील के छपरा गांव में 5 दिन पहले मंदिर के पास बरगद के पेड़ को काटने को लेकर गुर्जर समाज के लोगों ने दलित समुदाय के 6 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिससे गांव में तनाव पसरा था। महाशिवरात्रि के दिन जब दलित समुदाय की लड़कियां पूजा करने आईं तो कथित तौर पर गुर्जर समाज के भैयालाल पटेल और अन्य लोगों ने उन्हें रोका। इस बीच दलित समाज के कुछ युवक वहां पर आ गए। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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