लोगों को डराएं नहीं, कर्म के लिए प्रेरित करें ज्योतिषी

दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन कपूर ने शनिवार को ज्योतिष को ऐसी विद्या बताया जो लोगों को कर्म के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने ज्योतिष का अभ्यास करने वाले लोगों का आह्वान किया कि वे लोगों को व्यर्थ में भयभीत करने की बजाय उन्हें प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार करें।

न्यायमूर्ति कपूर ने यह बात राजधानी दिल्ली के भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) में आज से शुरू दो दिवसीय अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन को मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए कही। ‘‘दु:स्थान: अभिशाप या वरदान’’ विषय पर हो रहे इस सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज (आइकास) का नोएडा चैप्टर कर रहा है।

आइकास, नोएडा चैप्टर के चेयरमैन ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) सुभाष सी. शर्मा ने एक विज्ञप्ति में बताया कि सम्मेलन में न्यायमूर्ति कपूर ने ज्योतिष का अध्ययन और अभ्यास करने वाले लोगों से कहा कि जन्म कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव को सदैव नकारात्मक भावों की तरह देखने की जरूरत नहीं है। इसमें जीवन के कुछ ऐसे कारक छिपे हैं, जो आगे बढ़ने और लक्ष्य प्राप्ति में काफी मदद करते हैं। बारहवां भाव व्यय का माना जाता है । किंतु यह देने का घर है। उनके अनुसार जीवन में व्यक्ति तभी बहुत कुछ अर्जित कर सकता है, जब वह अपना धन, समय और प्रयास बहुत मात्रा में दूसरे लोगों को देता है। कुंडली पर विचार करते समय यह भी देखना चाहिए कि यदि बारहवां भाव पीड़ित होगा तो उस भाव में गयी राशि के अनुसार शरीर का संबंधित भाव भी पीड़ित होगा।

उन्होंने गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार भगवान कृष्ण ने शोकाकुल अर्जुन को फिर से गाण्डीव उठाने के लिए प्रेरित किया था, उसी प्रकार ज्योतिषियों को चाहिए कि वे उनसे सलाह लेने के लिए आए परेशानी और चिंताओं में फंसे लोगों को प्रयास रूपी गाण्डीव उठाने के लिए प्रेरित और उत्साहित करें।

आइकास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईएस अधिकारी ए बी शुक्ला ने अपने सम्बोधन में कहा कि मनुष्य के जीवन की वर्तमान परिस्थितियों के निर्माण में उसके पूर्व कर्मों का प्रभाव बहुत हद तक योगदान देता है। ज्योतिष की सहायता से इन पूर्व कर्मों के प्रभावों का पता लगाकर व्यक्ति को सही कर्मों के लिए प्रेरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष शास्त्रों में बारहवें घर में गये केतु की बहुत महिमा गायी गयी है और इसे मोक्षकारक बताया गया है। देखा जाए तो केतु ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जो माया के आवरण को काट कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कुंडली के द्वादश भाव में केतु के होने से कई और प्रभावों पर चर्चा की।

कानपुर से आये वरिष्ठ ज्योतिषी एवं आईकास के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष-प्रेस भोलानाथ शुक्ला ने ज्योतिष और वास्तु के आपसी संबंधों की चर्चा की। उन्होंने ज्योतिषयों से आग्रह किया कि वे किसी स्थान का वास्तु कर्म करने से पहले उस स्थान का प्रबंधन या संचालन करने वाले मुख्य व्यक्ति की कुंडली और उसके चतुर्थ भाव पर अवश्य विचार करें। उन्होंने आइकास के संस्थापक एवं प्रख्यात ज्योतिषी डा बी वी रमन के एक पत्र का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा कि इस संस्था का मकसद वर्तमान ज्योतिष से अस्वस्थ परंपराओं का निकालना है।

कुंडली के दुस्थानों की चर्चा करते हुए कानपुर से वरिष्ठ ज्योतिषी एवं आईकास के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश चिंतक ने कहा कि छठे भाव को रोग, ऋण और रिपु का भाव कहा जाता है। जिन लोगों के कर्म एवं वाणी ठीक रहेगी, उनका छठा भाव भी ठीक रहेगा। चिंतक ने छठे भाव में विभिन्न ग्रहों के बैठे होने के प्रभावों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद गोचर में शुभ माला योग बनने जा रहा है। कुंडली में माला योग बनने से व्यक्ति काफी उन्नति करता है। उन्होंने आगाह किया कि कुंडली देखते समय यह अवश्य पता करना चाहिए कि यह शुभ माला योग है या अशुभ।

जयपुर के वास्तुविद् एवं ज्योतिषी पं. सतीश शर्मा ने कहा कि कुंडली के 6-8-12 भाव बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनमें आयु और आरोग्य आता है। भूख भी आरोग्य के तहत ही आती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के शरीर में वात-पित्त-कफ को शुद्ध किए बिना जीवन स्वथ्य नहीं बनाया जा सकता, उसी प्रकार कुंडली के इन तीनों भावों की शुद्धि के बिना जीवन में उन्नति नहीं की जा सकती। इन तीनों ही भाव से विपरीत राजयोग बनते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल अधिकतर राजनीतिक नेताओं की कुंडली में विपरीत राजयोग, नीच का चंद्रमा और दुस्थानों में राहु देखने को मिलता है।

आईकास के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रदीप चतुर्वेदी ने कहा कि दुस्थानों को लेकर लोगों के मन में गलत धारणाएं नहीं बनायी जानी चाहिए। यह जीवन के महत्वपूर्ण पक्षों जैसे संघर्ष, प्रतिस्पर्धा, रिसर्च, विदेश यात्रा आदि से जुड़े भाव हैं। उन्होंने उम्मीद जतायी कि सम्मेलन में होने वाले विचार मंथन के माध्यम से इन तीनों भावों से जुड़े कई नये रहस्यों पर से पर्दा उठेगा। सम्मेलन में ग्वालियर से आए परमेंद्र चतुर्वेदी, नोएडा से शैफाली मित्तल और रोहिणी से नितिन कश्यप ने दुस्थानों से जुड़े अपने अनुभवों और निष्कर्षों को साझा किया।      

सम्मेलन में देशभर से आये ज्योतिषी मुख्य विषय के आलोक में ज्योतिष सूत्रों पर मंथन करेंगे और अपने अनुभव ज्योतिष अनुरागियों के बीच साझा करेंगे। आइकास ज्योतिष का वैज्ञानिक ढंग से प्रचार प्रसार करने को प्रतिबद्ध एक पंजीकृत संस्था है। देशभर में इसके करीब 60 चैप्टरों के माध्यम से ज्योतिष का अध्ययन वैज्ञानिक रीति से करवाया जाता है। आइकास इस तरह के वार्षिक सम्मेलन व़िगत में देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित करवाता रहा है।

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