दादा की स्मोकिंग का असर पोते-पोतियों तक पर

आमतौर पर अध्ययनों में पाया जाता है कि स्मोकिंग से फेफड़े खराब होते हैं और कैंसर का भी कारण बनता है। मगर एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि किसी के पूर्वजों द्वारा की गई स्मोकिंग का खामियाजा उस शख्स को भुगतना पड़ सकता है। रिसर्च के अनुसार अगर कोई स्मोकिंग का आदी है तो इसका दुष्परिणाम उसकी कुछ पीढ़ियों तक बरकरार रह सकता है। मतलब, आप स्मोकिंग करते हैं तो इसका दुष्परिणाम न सिर्फ आपकी सेहत पर पड़ेगा बल्कि पोते-पोती, परपोते-परपोती पर भी पड़ेगा। ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है।

इस अध्ययन को ‘चिल्ड्रेन ऑफ 90’ कहा जा रहा है। क्योंकि चिल्ड्रेन ऑफ 90 प्रोजेक्ट के तहत इस रिसर्च को अंजाम दिया गया है। यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट जर्नल में हाल ही में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में पिछले 30 साल के दौरान खून, पेशाब, प्लेसेंटा, दांत, बाल और नाखूनों के 15 लाख सैंपल इकट्ठे किए गए थे। इस अध्ययन का उद्देश्य अनुवांशिक और पर्यावरण का लोगों की सेहत पर असर की जानकारी एकत्र करना था। अध्ययन से पता चला कि धूम्रपान का बुरा असर सिर्फ धूम्रपान करने वाले तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसका असर अगली पीढ़ियों तक देखा गया है। अध्ययन में दादा और परदादा ही शामिल हुए थे, क्योंकि दादी और परदादी के युवावस्था में धूम्रपान करने की संख्या काफी कम थी।

अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं के दादा या परदादा ने युवावस्था से पहले स्मोकिंग करना शुरू कर दिया था, उसकी वजह से उनके शरीर में फैट बढ़ा हुआ पाया गया था। अध्ययन से यह भी पता चला कि जिन महिलाओं के दादा या परदादा 13 साल की उम्र से पहले से स्मोकिंग कर रहे थे, उनके शरीर में ज्यादा चर्बी पाई गई थी। इसकी तुलना में बाद में स्मोकिंग शुरू करने वाले दादा-परदादा के बच्चों में कम चर्बी थी। हालांकि इस अध्यय से एक चौंकाने वाली बात भी सामने आई। अध्ययन के अनुसार दादा या परदादा के धूम्रपान का असर पोती या परपोतियों में ही देखा गया, जबकि पोतों या परपोतों पर कोई प्रभाव नहीं दिखा।

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