राजस्थान में गिरे कई उल्कापिंड

राजस्थान की धरती पर आसमान से गिरते गोलों (उल्का पिंड) के पहली बार सीसीटीवी कैमरे में कैद होते ही दुनिया भर में हलचल मच गई है। गत 3 जनवरी को हुई इस रोमांचक घटना के बाद वैज्ञानिकों की निगाहें नागौर के बड़ायली और उसके 40 किलोमीटर दायरे के 15 गांवों में टिक गई हैं। इसरो टीम इसका रहस्य खोजने में जुटी है।

राज्य में अब तक 21 उल्का पिंड गिरे हैं। इन पत्थरों में जीवन व ब्रह्मांड से जुड़े कई राज छिपे हैं और इनकी कीमत करोड़ों में है। साल 2000 के बाद अब तक 6 अलग-अलग प्रकार के उल्का पिंडों की पहचान राजस्थान में की गई है। 30 मई 2000 में जयपुर से 44 किमी दूर इटावा भोपाजी में एक किलो वजनी उल्कापिंड गिरा। 2001 में हनुमानगढ जिले के अरारकी गांव में 4.46 किलो का चुंबकीय पत्थर गिरा। इसी प्रकार जोधपुर के भवाद गांव में  6 जून 2002 को 678 ग्राम का उल्कापिंड आसमान से गिरता देखा गया। 29 अगस्त 2006 को चित्तौडगढ जिले के रावतभाटा क्षेत्र के गांव कावरपुरा में दो चरवाहों ने 6.8 किलोग्राम का उल्कापिंड गिरते देखा। 6 जून 2017 को जयपुर के ही मुकुन्दपुरा गांव में दो किलो का उल्कापिंड गिरा। जिस स्थान पर यह टुकड़ा गिरा, वहां 15 सेंटीमीटर गहरा और 40 सेंटीमीटर चौड़ा गड्ढा हो गया। उसके बाद 19 जून 2020 को जालोर जिले के सांचोर में तड़के 2.8 किलो वजनी उल्कापिंड गिरने से एक फुट गहरा गड्ढा हो गया। अब आसमान से उल्कापिंड गिरने की ताजी घटना गत 3 जनवरी को नागौर की है, जिसकी जांच की जा रही है।

धरती पर उल्का पिंड गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। पृथ्वी के 71 फीसदी क्षेत्र पर पानी है और 29 फीसदी ही जमीन है। अधिकतर उल्का पिंड तो पानी में गिरकर ही नष्ट हो जाते हैं। कई बार ये हवा में फटकर राख हो जाते हैं। कई बार लोगों को इनकी जानकारी मिलती है तो वैज्ञानिक इन पर रिसर्च करते हैं।

उल्का पिंड के अध्ययन से इनके ग्रहों और सोलर सिस्टम पर रिसर्च आसान होती है। इससे पता चलता है दूसरे ग्रहों पर किस तरीके के पदार्थ उपलब्ध हैं और धरती के वातावरण के बाहर की दुनिया का अध्ययन करने में सटीक जानकारी मिलती है। जैसे मेक्सिको में गिरे उल्का पिंड से ही मंगल गृह पर पानी होने का पता लग पाया था। एक बार रिसर्च पब्लिश होने के बाद उल्का पिंड की पुष्टि हो जाती है। इससे उस उल्का पिंड का नामकरण भी कर दिया जाता है। उल्का पिंडों का वर्गीकरण उनके संगठन के आधार पर किया जाता है। कुछ पिंड लोहे, निकल या मिश्र धातुओं से बने होते हैं। कुछ सिलिकेट खनिजों से बने पत्थर जैसे होते हैं।

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