जैसलमेर में मिलीं हजारों साल पुरानी डिजाइन

जैसलमेर की पाकिस्तान से सटी सीमा के पास रहस्यमयी चित्र मिले हैं। मछली, दिल के आकार, गोल सर्पीले आकार, 11 किलोमीटर तक सीधी लकीर और शतरंज की बिसात की तरह बड़े-बड़े डिजाइन बने हुए हैं। ये डिजाइन हजारों से साल पहले के बने बताए जा रहे हैं। फ्रांस के दो वैज्ञानिकों की घोषणा के बाद इंटेक ने सर्वें शुरू किया था। करीब 8 महीने तक इस पर काम किया गया। दो दिन पहले ही इंटेक ने डिजाइन को खोजा है। यह रेखाचित्र जैसलमेर के बोहा, नेहड़ाई, सेलता, सलखा, ओला, नेतसी, खींवसर, पोहड़ा, कन्नोई, दूजासर व सियाम्बर गांवों के समीप चट्टानों व पथरीली सतहों पर मिले हैं। डिजाइन को एलियन्स के हेलीपेड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आसमान से देखने पर रहस्यमयी चित्र देखने को मिलते हैं।

नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एण्ड कल्चर हेरिटेज (इंटेक) के ठाकुर विक्रम सिंह नाचना ने बताया कि जैसलमेर में करीब एक साल पहले फ्रांस के दो वैज्ञानिकों ने विश्व के सबसे बड़े सतही रेखाचित्र ढूंढ़ने की घोषणा की थी। वैज्ञानिक उकार्लो ओथेमेर व योहान ओथेमेर को गूगल अर्थ पर जैसलमेर के बोहा गांव में जियोगलिफ्स मिले थे। उन्होंने सर्वे करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोहा गांव में अलग-अलग चार जियोगलिफ्स की घोषणा की।

घोषणा के बाद इंटेकभारतीय सांस्कृतिक निधि और न्यास नई दिल्ली की ओर से कई रेखाचित्रों को ढूंढने का प्रयास किया जा रहा था। इस खोज में इंटेक को करीब 6 से 8 महीने लगे। अलग-अलग जगहों पर उनके बताए गए गांवों में 22 ऐसी जगहें खोजी, जहां रहस्यमयी रेखाचित्र बने है।इंटेक के बाड़मेर से आए यशोवर्द्धन शाण्डिल्य ने बताया कि यह एक महत्त्वपूर्ण खोज है। पहली बार जैसलमेर में एक साथ इतने सारे अलग-अलग प्रकार के रेखाचित्र मिले हैं। इन्हें जियोगलिफ्स व मेगालिथ कहते हैं। पुरातन काल में इस इलाके में अति विकसित सभ्यता रही होगी। विक्रम सिंह नाचना ने बताया कि इसे संरक्षित करने का काम किया जाएगा। भारत सरकार व राजस्थान सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इस महत्वपूर्ण खोज वाले इलाके में औद्योगिक गतिविधियां व अतिक्रमण न हो, इसका प्रयास भी किया जाएगा।

शाण्डिल्य ने बताया कि जैसलमेर के विशाल रेगिस्तानी भू-भाग पर कई स्थानों पर प्राचीन सभ्यता के रेखाचित्रों को इंटक के प्रयासों से खोजा गया। ये रेखाचित्र जिले के राजस्व गांव बोहा, नेहडाई, सेलता, सलखा, ओला, नेतसी, खींवसर पोहडा, कनोई, दूजासर व सियाम्बर गांवों के नजदीक चट्टानी व पथरीली सतहों पर देखने को मिले हैं।इंटेक चेयरमेन ललित कुमार गुप्ता ने बताया कि इस प्रकार की खोज को संस्था आगे भी जारी रखेगी।

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