एमबीए पास उद्यमी कम, कर्जदार ज्यादा

कई देशों में एमबीए करने वाले छात्र उद्यमी कम, कर्ज के बोझ तले अधिक दब रहे हैं। ये कड़वी हकीकत दुनियाभर के आंकड़ों में सामने आई है।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार भारत के 3000 से अधिक एमबीए कॉलेजों से पास होकर निकलने वाले 93 फीसदी एमबीए ग्रेजुएट छात्र बेरोजगार हैं। इनमें कई छात्रों ने शिक्षा के लिए लोन लिया, लेकिन उसे चुकाने में सफल नहीं हो पा रहे। लाखों बच्चे देश या विदेश से एमबीए की डिग्री तो ले रहे, परंतु उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही। इसके पीछे का कारण संस्थानों में मोटी फीस ले कर भी ढंग की शिक्षा और शिक्षक दोनों ही नहीं मिल रहे।
वास्तव में अधिकतर प्राइवेट संस्थान छात्रों को ढंग की शिक्षा नहीं दे रहे, जिस कारण ये छात्र कंपनियों द्वारा लिए जा रहे इन्टरव्यू को पास नहीं कर पा रहे। इससे हताश हो एमबीए करने वाले कई छात्र गार्ड तक की नौकरी करने को मजबूर हैं।

पिछले साल मार्च में सामने आए एक आँकड़े के अनुसार विगत तीन साल में बैंकों ने जितना शिक्षा ऋण दिया उसका 9.95 फीसदी पैसा एनपीए हो गया, जो वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में कहीं अधिक था। बैंक से छात्र लोन तो लेते हैं, लेकिन उसे अच्छी नौकरी न मिल पाने के कारण चुकाने की समस्या बढ़ रही है। यही कारण है कि एनपीए के मामले में शिक्षा ऋण शीर्ष पर है। आंकड़ों के अनुसार अकेले एमबीए के छात्रों ने कुल 9,541 करोड़ रुपये लोन लिए थे। इसमें से 685 करोड़ रुपये एनपीए हो गए है। केवल भारत ही नहीं, अन्य देशों का हाल भी यही है।

अमरीका में पिछले कई दशकों में छात्रों पर कर्ज बढ़ा है। फेडरल रिजर्व की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में अमेरिका में छात्रों पर 1.74 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है। वर्ष 2020 की तुलना में ये आंकड़ा 3 फीसदी अधिक है। बिडेन प्रशासन द्वारा फेडरल छात्रों के ऋण ब्याज दरों पर दी गई राहत के बावजूद आंकड़ों में वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है।
अमरीका के एमबीए ग्रेजुएट्स पर सामूहिक रूप से 3.7 बिलियन डॉलर का शैक्षणिक ऋण है।

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