अनूठी है विवाद निपटारा होली

बीकानेर में पुष्करणा ब्राह्मण समाज के दो वर्ग—हर्ष औऱ व्यास के बीच सैकड़ों साल पहले एक विवाद को समाप्त करने का अनूठा निर्णय लिया गया। इसी निर्णय की पालना में हर साल की तरह आज बुधवार को भी इन वर्गों के लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर पानी का वार किया। चमड़े से बनी डोलची में पानी डालकर एक दूसरे की पीठ पर करीब दो घंटे तक वार करते रहे औऱ हर वार के बाद दोनों जाति के लोग एक दूसरे को गले लगाते रहे।

बुधवार को हर्षों के चौक में दोपहर दो बजे से चार बजे तक हर्ष और व्यास जाति के बच्चों, युवाओं और वृद्धजनों ने एक दूसरे पर जमकर पानी से वार किए। चमड़े की डोलची में पानी को डालकर पूरी ताकत से हर्ष जाति के युवाओं ने व्यासों को और व्यास युवाओं ने हर्षों की पीठ पर वार किया। ये चोट इतनी जबर्दस्त होती है कि कई युवाओं की कमर लाल हो जाती है। डोलची की आकृति इस तरह की होती है कि पानी बहुत तेज गति से सामने वाले की कमर पर लगता है।

हर्षों के चौक से कुछ ही दूरी पर व्यासों का चौक है। जहां से व्यास युवा और बच्चे दौड़ते हुए ही पहुंचते हैं। हर्ष भी उन्हें देखकर सामने दौड़ लगाते हैं। दोनों चौकों के बीच वे एक दूसरे के आमने-सामने होते हैं। परंपरागत रूप से दोनों एक दूसरे को गालियां निकालते हैं, फिर गीत गाते हैं। इसके बाद पानी का खेल शुरू हो जाता है। करीब दो घंटे तक हर्ष और व्यास वर्ग के लोग एक-दूसरे के साथ खेलते हैं। आमतौर पर ये दोनों वर्ग एक दूसरे के रिश्तेदार होते हैं। इस खेल में कोई बड़ा या छोटा नहीं होता, बल्कि होली के रसियों की तरह एक दूसरे पर जमकर हमला करते हैं। अगर उम्र में बड़े पर कोई पानी से मारता है तो फिर उनके पैरों के हाथ भी लगाता है। बराबर के युवा आपस में भिड़ रहे हैं तो बाद में गले भी मिलते हैं।

उल्लेखनीय है किराजाओं के राज में किसी भी बड़े आयोजन के लिए अनुमति लेनी होती थी। ऐसे में कीकाणी व्यास समाज को मृत्युभोज या प्रीति भोज का आयोजन करने के लिए अनुमति देने की स्वीकृति राज परिवार से मिली हुई थी। एक बार आचार्यों और व्यासों के बीच विवाद हो गया। अनुमति नहीं मिलने से निराश आचार्यों के साथ हर्ष खड़े हो गए। इससे नाराज व्यासों ने हर्षों के चौक में बन रहे भोजन के बर्तन आदि सामान तोड़ दिए। दोनों के बीच लंबा संघर्ष हुआ। इसी संघर्ष को खत्म करने के लिए दोनों समाज ने तय किया कि आगे भी प्रेम बना रहे, इसके लिए हर साल एक खेल होगा। इसमें दोनों एक दूसरे पर वार करेंगे, लेकिन पानी से।

खेल शुरू होने के दो घंटे बाद हर्ष जाति के लोग गुलाल उछालकर खेल को समाप्त कर देते हैं। इसके बाद फिर हर्ष और व्यास आमने-सामने होते हैं। खेल के दौरान पानी के दर्जनों टैंकर आते हैं। गुलाल उछालने के बाद कोई पानी नहीं डालता।

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