होली पर निभाई मनुहार परंपरा

मारवाड़ में होली-दिवाली के मौके पर निभाई जाती है मनुहार की परंपरा। रियासतकाल में अफीम से ये मनुहार की जाती थी। तब कोई शादी हो, सगाई हो, शोक हो, मिलना-बिछड़ना हो या आपसी समझौते के तहत झगड़ा ही खत्म करना हो तो मनुहार की जाती थी।

अब समय बदलने के साथ इसमें परिवर्तन कर केसर से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। नागौर जिले के खींवसर फोर्ट में होली के मौके पर प्रदेश के पूर्व केबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह ने लोगों से रामा-श्यामा की। फोर्ट की 500 साल से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए गजेंद्र सिंह ने लोगों से मनुहार भी की।

मारवाड़ी शब्द रियाण मतलब मेल-मिलाप के दौरान यहां क्षेत्र के लोग एकत्र होते हैं। कई जगह मांगणियार भी बैठते हैं। एक ओर जहां शरीर में केसर की महक घुलती है, वहीं दूसरी ओर मांगणियार अपनी सुरीली आवाज का रस फिजाओं में घोलते हैं। इसबार रियाण में पूर्व केबिनेट मंत्री व खींवसर ठाकुर गजेंद्र सिंह और उनके पुत्र धनंजय सिंह लोगों से केसर की मनुहार करते हैं। केसर लेने वालों को तीन बार हथेली भर कर केसर पिलाया जाता है। परंपरा है कि जब तक केसर समाप्त न हो, हथेली को बिना हिलाए सामने की तरफ ही रखना पड़ता है।

धनंजय सिंह खींवसर ने बताया कि मनुहार की ये परंपरा 500 साल से चली आ रही है। इस दौरान 36 कौम के लोग एक जगह बैठकर सामाजिक समरसता दिखाते हैं। इससे आने वाले नए दिन में एक साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलती है।

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