भवन निर्माण पर लेबर सेस वसूलेगी सरकार

राजस्थाम में साल 2009 या उसके बाद मकान या अन्य निर्माण करवाने वालों से सरकार लेबर सेस की वसूल करेगी। इसके लिए श्रम विभाग ने प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों को पत्र लिखा है। इसमें उनसे 2009 से जारी बिजली के कनेक्शनों की जानकारी मांगी है। इन बिलों के आधार पर विभाग लोगों को रैंडम नोटिस जारी करके लेबर सेस जमा करवाने के लिए कहेगा।

केन्द्र सरकार ने निर्माणकार्य में लगे श्रमिकों के कल्याण के लिए साल 2009 में एक कानून लाकर लेबर सेस का प्रावधान किया था। इसके तहत कोई भी व्यक्ति, संस्था या कंपनी निर्माण करवाती है तो उसे इस निर्माण की कुल लागत का एक फीसदी राशि लेबर सेस के रूप में सरकार को देना पड़ता है। निर्माण श्रमिक सेस फंड में जमा इस राशि को सरकार श्रमिकों के लिए चलाई जा रही 13 तरह की योजनाओं में अनुदान या सहायता के रूप में देती है।

राजस्थान श्रम विभाग के कमीश्नर अंतर सिंह नेहरा ने बताया कि हमने तीनों डिस्कॉम जयपुर, जोधपुर और अजमेर के एमडी को पत्र लिखा है कि वे अपने-अपने एरिया के सभी जिलों के बिजली के कनेक्शन जारी करने की सूचना हमें उपलब्ध करवाएं। 2009 के बाद जारी बिजली के बिलों को आधार मानकर रैंडम नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस के बाद मौके मुआयनाके आधार पर व्यक्ति से लेबर सेस वसूला जाएगा।

नेहरा ने बताया कि अगर सेस के निर्धारण को लेकर कोई विवाद होता है तो उसके लिए नियमों में निर्माण लागत भी निर्धारित की है, जो पीडब्ल्यूडी और बाजार मूल्य से भी कम है। हमने किसी भी ए क्लास के निर्माण की प्रतिवर्ग फीट की लागत 1 हजार रुपए से भी कम निर्धारित कर रखी है। जिस व्यक्ति के घर या संस्था का जितना बिल्टअप एरिया होगा, उसे हमारी निर्धारित लागत से जोड़करनिर्माण लागत का निर्धारण और सेस की गणना की जाएगी।

वर्तमान में राज्य सरकार ने पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के काल्याणकी13 योजनाएं चला रखी है। इसमें निर्माण श्रमिक सुलभ्य आवास योजना, निर्माण श्रमिक जीवन व भविष्य सुरक्षा योजना, निर्माण श्रमिक टूलकिट सहायता योजना, शुभशक्ति योजना, प्रसूति सहायता योजना, सिलिकोसिस पीड़ित सहायता योजना, अंतरराष्ट्रीय खेल प्रत्सोहान सहायता योजना, आईआईटी/आईआईएम में प्रवेश पर ट्यूशन फीस पुर्नभरण योजना आदि हैं। इन योजनाओं में 11 लाख रुपए तक प्रोत्साहन, अनुदान व सहायता राशि दी जाती है।

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