गांव में हर जगह रामचरित चौपाईयां

राजसमंद जिले में एक ऐसा अनोखा गांव है, जो कलियुग में त्रेतायुग का अहसास कराता है। यह है नाथद्वारा उपखंड का बामनहेड़ा गांव। इस गांव के हर घर के बाहर दीवार पर रामचरित मानस की चौपाईयां लिखी हैं। गांव वालों का मानना है कि ऐसा करने से गांव के बच्चे संस्कारवान बनेंगे। तब संकीर्ण सोच और अपराध पर रोक लगेगी। चौपाईयां लिखने का एक मकसद ग्रामीणों को राम के जीवन चरित्र से अवगत कराना भी है।

करीब 650 साल पुराने बामनहेड़ा गांव में आज भी अपनी सभ्यता और संस्कार बचाने के लिए रामायण की चौपाईयों का सहारा लिया जा रहा है। गांव की दुकानें हो या मकान, दफ्तर हों या स्कूल, सभी इमारतों की दीवारों पर रामचरितमानस की चौपाईयां मिलती हैं। गांव वालों का कहना है कि इसका असर भी हो रहा है। युवा पीढ़ी का भी अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति जुड़ाव गहराया है। ग्रामीणों का कहना है कि युवा पीढ़ी को गांव से अच्छे संस्कार मिलें तो वे समाज में अपना व दूसरों का जीवन संवार सकते हैं।

बामनहेड़ा के सरपंच गोपाल जोशी ने बताया कि घर घर रामचरितमानस की चौपाइयां लिखने की शुरुआत 5 महीने पहले की थी। गांव में करीब 300 घर हैं और 1500 से अधिक लोगों की आबादी है। शुरुआत में स्थानीय निवासी राजू जोशी ने इस कार्य के लिए 50 हजार की राशि देकर सहयोग किया था। धीरे-धीर पूरा गांव इस पहल से जुड़ता गया। सहयोग राशि देकर चौपाईयां लिखवाने का चलन निकल पड़ा। सरपंच जोशी ने बताया कि अब पूरी पंचायत के सभी घरों के बाहर चौपाईयां लिखाने का कार्य ग्रामीणों के सहयोग से करवाया जा रहा है।

बामनहेड़ा गांव राजसमंद मुख्यालय से रेलमगरा रोड पर करीब 15 किलोमीटर दूर है। बनास नदी के किनारे बसा ये गांव कांकरोली व नाथद्वारा के बॉर्डर पर स्थित है। गांव में एक पोस्ट ऑफिस है, जिसकी दीवारों पर भी रामायण की चौपाइयां लिखी गई हैं।

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