शहर में रोजगार के लिए जन-आधार कार्ड जरूरी

राजस्थान में ‘इन्दिरा गांधी शहरी रोजगार योजना’ के लिए नए दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान की गई है। राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना (मनरेगा) की तर्ज पर शहरी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है।

इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। योजना पर राज्य सरकार प्रतिवर्ष 800 करोड़ रूपए खर्च करेगी। 

योजना के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रस्तावित योजना में स्थानीय निकाय क्षेत्र में निवास कर रहे 18 वर्ष से 60 वर्ष की आयु के सदस्य का जन आधार कार्ड के आधार पर पंजीयन किया जाएगा। योजना में राज्य/जिला/निकाय स्तर पर कमेटियों के माध्यम से कार्य स्वीकृत एवं निष्पादित करवाए जाएंगे। सामान्य प्रकृति के कार्य स्वीकृत एवं निष्पादित कराने की सामग्री लागत व पारिश्रमिक लागत का अनुपात 25:75 तथा विशेष प्रकृति के कार्यों हेतु सामग्री लागत तथा पारिश्रमिक भुगतान का अनुपात 75:25 होगा।

कार्यों का भुगतान मनरेगा के तरह श्रमिकों के बैंक खाते में 15 दिन में कर दिया जाएगा। योजना में कार्यस्थल पर श्रमिकों को सुविधाएं प्रदान करने के साथ ही शिकायतों के निवारण एवं सामाजिक अंकेक्षण के प्रावधान भी किए गये हैं। मनरेगा योजना के अनुरूप प्रस्तावित योजना के लिए प्रशासनिक व्यय को 800 करोड़ रूपए के 6 प्रतिशत तक सीमित रखे जाने के प्रस्ताव पर भी सहमति प्रदान की गई है।

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