प्रमोद मुश्किल में, कांग्रेस विधायक बाड़ाबंदी में

राज्यसभा चुनाव के लिए राजस्थान में सुभाष चंद्रा के उतरने से कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी के अरमानों पर पानी फिर सकता है। निर्दलीय प्रत्याशी चंद्रा को भाजपा ने समर्थन दे दिया है।

कांग्रेसी खेमे के नाराज विधायकों ने सियासी हलचल बढ़ाई है। उन्हें मनाने के साथ डैमेज कंट्रोल का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संभाल लिया है। विधायकों पर खुफिया निगरानी बढ़ा दी गई है। नाराज विधायकों पर पुलिस की खास नजर है। इन विधायकों के मिलने-जुलने वालों तक पर निगाह रखी जा रही है। वैसे कांग्रेस विधायकों की गुरुवार से उदयपुर में बाड़ेबंदी शुरू हो गई। कुछ विधायक उदयपुर पहुंच गए हैं। कांग्रेस विधायक रफीक खान और सीएम के खास नेताओं ने कल ही उदयपुर पहुंचकर चिंतन शिविर वाले होटल ताज अरावली में बाड़ेबंदी की व्यवस्थाएं संभाल ली हैं। इधर जयपुर से भी कांग्रेस विधायकों को बसों से उदयपुर रवाना कर दिया गया है।

राजस्थान की चार राज्यसभा सीट पर पांच उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेस की ओर से रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी ने नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि भाजपा की तरफ से घनश्याम तिवाड़ी किस्मत आजमा रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरे सुभाष चंद्रा को भाजपा समर्थन दिया है, जिसके चलते कांग्रेस के तीसरे कैंडिडेट प्रमोद तिवारी की राज्यसभा पहुंचने की मुश्किलें बढ़ गई है। 

राजस्थान में कुल 200 विधायक हैं। ऐसे में एक राज्यसभा सीट के जीत के लिए 41 वोट चाहिए। भाजपा के पास फिलहाल 71 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस पास 108 विधायक हैं। इस तरह भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी के 41 वोट के साथ जीत तय है और उसके बाद 30 वोट अतिरिक्त बचते हैं। कांग्रेस के पास फिलहाल 109 विधायकों के अलावा 13 निर्दलीय, 2 सीपीएम और दो बीटीपी के विधायक हैं। तीन विधायक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हैं। कांग्रेस की दो सीटें तो कन्फर्म हैं, जिसके बाद 27 अतरिक्त वोट बचेंगे। 

कांग्रेस को तीसरी सीट जीतने के लिए 14 वोट चाहिए होंगे तो भाजपा के समर्थन के बाद सुभाष चंद्रा को 11 वोट तलाशना होगा। कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद तिवारी को 14 वोटों की जरूरत है। कांग्रेस को समर्थन करने वाले कई विधायक नाराज हैं। बीटीपी अपना पत्ता नहीं खोल रही है। गहलोत सरकार को समर्थन दे रहे विधायकों की बैठक में बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले संदीप यादव और वाजिब अली नहीं आए थे। इसके अलावा निर्दलीय विधायक रमीला खरिया और बीटीपी के दोनो विधायक भी नहीं शामिल हुए हैं। 

बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए सभी 6 विधायकों को भी ऑफर दिए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा ने 6 गैर भाजपा विधायकों का जुटा लिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बीमार चल रहे और पिछली बार बग़ावत करने वाले विधायक भंवरलाल शर्मा के घर पहुंचे। इस तरह से कांग्रेस नेतृत्व तीनों राज्यसभा जिताने के लिए जुटी है तो भाजपा भी सुभाष चंद्रा के पक्ष में मजबूती से खड़ी है। ऐसे में अगर दो-चार विधायक इधर से उधर हुए तो प्रमोद तिवारी के राज्यसभा पहुंचने के अरमानों पर पानी फिर सकता है।

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