ऑनर किलिंगः कानून हाथ में नहीं ले सकते

राजस्थान उच्च न्यायालय ने ‘ऑनर किलिंग’ के मामले में लड़की के भाई समेत दो आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कोई भी नागरिक अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता है। प्रत्येक नागरिक अपने मौलिक अधिकार का उपयोग कर सकता है। यदि उसके अधिकारों में किसी तरह की बाधा डाली जा रही है तो वह कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का सहारा ले सकता है। किंतु किसी भी नागरिक को कानून को अपने हाथों में लेने की अनुमति नहीं है।

मामला बूंदी जिले का है। वहां ऑनर किलिंग का शिकार हुए मृतक आजाद और आरोपी याचिकाकर्ता भीम सैनी की बहन के बीच प्रेम संबंध से परिवार वाले खुश नहीं थे। दोनों शादी के बाद भाग गए। बाद में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और लड़की को परिवार वालों के साथ जाने के लिए कहा गया। मृतक ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसके बाद दोनों पक्षों ने समझौते के माध्यम से मामले को सुलझाने का प्रयास किया और आजाद ने याचिका वापस ले ली। कुछ समय बाद वह लापता हो गया और उसका शव तालाब में पड़ा मिला। पुलिस ने मामले की जांच की तो वह ऑनर किलिंग का मामला निकला।

इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील देते हुए कहा गया कि दोनों याचिकाकर्ताओं का नाम एफआईआर में नहीं है। उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है। उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी नहीं हैं। इन तथ्यों के आधार पर जमानत मांगी गई। साथ ही घटना के समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। याचिका के अनुसार मामला पिछले वर्ष सितंबर महीने का है। 22 सितंबर 2021 को बूंदी के तालेड़ा थाने में रामदेव ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया कि उसके बेटे का शव 21 सितंबर को तालाब में मिला था। उन्होंने हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की और भीम सैनी और शुभम को गिरफ्तार कर लिया।

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