राममंदिर के लिए लाल पत्थर का वैध खनन शुरू

अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर के लिए अब राजस्थान के प्रसिद्ध लाल व गुलाबी पत्थरों की कमी नहीं आएगी। प्रदेश की गहलोत सरकार ने सारी बाधाएं दूर कर इन पत्थरों के वैध खनन के पुख्ता इंतजाम कर दिए। इसके साथ ही बंशीपहाड़पुर क्षेत्र की तीन खदानों में खनन कार्य शुरू हो गया। यहां पत्थरों का वैध खनन करीब 26 साल बाद शुरू हुआ है। जुलाई में 34 अन्य खदानों से पत्थर निकलने लग जाएंगे।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी व भूजल डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि बंशीपहाड़पुर के 37 मंशापत्रधारकों को राजस्थान राज्य स्टेट एंवारयरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट कमेटी द्वारा पर्यावरण स्वाकृति जारी कर दी गई। इसके साथ ही करीब 26 साल बाद बंशीपहाड़पुर के प्रसिद्ध लाल व गुलाबी पत्थर के वैध खनन की राह खुल गई। इसी माह क्षेत्र में 3 खानों में गुलाबी और लाल पत्थर का खनन शुरू हो गया है। जुलाई के पहले पखवाड़े तक बंशीपहाड़पुर के शेष 34 मंशापत्र धारकों द्वारा खनन आरंभ कर दिया जाएगा। इससे अब राज्य सरकार को राजस्व, नया निवेश और रोजगार के अवसर बढेंगे।

डॉ. अग्रवाल के अनुसार बंशीपहाड़पुर में वैध खनन कार्य शुरू कराना बड़ा चुनौती भरा काम था। उच्च तक न्यायालय के आदेश से दिसंबर 1996 से बिना डायवर्जन के गैर वानिकी कार्य प्रतिबंधित किए जाने से इस क्षेत्र में वैध खनन बंद हो गया था। हालांकि देश-दुनिया में बंशीपहाड़पुर के पत्थर की मांग को देखते हुए क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा था।

एसीएस माइंस ने बताया कि राममंदिर के लिए पत्थर से जुड़ा अतिसंवेदनशील मामला होने के कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस प्रकरण में गंभीर थे और उनके प्रयासों से ही पहले अतिसंवेदनशील बंशीपहाड़पुर खनन क्षेत्र ब्लॉक ए व बी सुखासिला एवं कोट क्षेत्र को बंध बारेठा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से बाहर करवाया गया। उसके बाद केन्द्र सरकार के वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन भूमि के डायवर्जन की स्वीकृति जारी कर दी।

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