ठोकरें खाकर जनसेवा में जुटे सुशील कुमार

कौन बनेगा करोड़ के 5वें सीजन में 5 करोड़ जीतकर इतिहास रचाने वाले बिहार के सुशील कुमार के सपने अधूरे रह गए। इतनी बड़ी धनराशि जीतने के बाद भी एक वक्त वो बेरोजगार हो गए। 

अपनी सूझ बूझ से करोड़पति बने सुशील कुमार देखते देखते बिहार के स्टार बन गए थे। केबीसी के मंच पर आने से पहले सुशील कुमार आईएएस की तैयारी कर रहे थे। लेकिन शोहरत मिलने के बाद वे स्टारडम वाली लाइफ में इतना मशगूल हुए कि उनका ये सपना पीछे छूट गया। पढ़ाई पूरी न हो पाने का जिम्मेदार सुशील कुमार ने मीडिया एक्सपोजर को ठहराया। 

सुशील ने एक इंटरव्यू में बताया- मैं तब अपनी सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी कर रहा था, इसलिए करोड़पति बन गया। इसके बाद मीडिया एक्सपोजर ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया था। मीडिया को मेरी पर्सनल लाइफ में ज्यादा दिलचस्पी थी। मेरा बर्ताव प्रभावित हो गया। मैं फैसले लेने से पहले सोचता था कि मीडिया क्या कहेगी? मैं मीडिया के एक्सपोजर में आ चुका था, इसलिए मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाया।

सुशील की जिंदगी में काफी कुछ घटा। 2020 में फेसबुक पोस्ट में सुशील ने अपनी जिंदगी के बुरे दौर का जिक्र किया था। केबीसी से फेम मिलने के बाद उनकी जिंदगी ने करवट ले ली थी। 2015-16 उनकी लाइफ का चुनौतीपूर्ण समय था। उन्होंने जो भी बिजनेस किया वो नहीं चला। वो गुप्त दान करने लगे थे। कईयों ने उन्हें ठगा भी। इन सभी उथल पुथल के बीच उनके पत्नी से भी रिश्ते बिगड़ने लगे थे। इस बीच सुशील को स्मोकिंग और शराब की लत भी लग गई थी। एक दिन उन्होंने मीडिया को कहा था कि वे दिवालिया हो गए हैं। इसके बाद उन्हें इवेंट्स में लोगों ने बुलाना बंद कर दिया।

सुशील ने इसके बाद मुंबई जाकर फिल्ममेकर बनने का सपना देखा। 6 महीने तक वे मुंबई में रहे। एक प्रोडक्शन हाउस के लिए 3 स्क्रिप्ट लिखीं। इस दौरान उन्हें एहसास हुआ कि शोबिज वर्ल्ड उनके लिए नहीं है और वे अपने घर लौट आए। उन्होंने फिर टीचिंग का कोर्स किया। इस समय सुशील कुमार बिहार चुनाव आयोग के ब्रांड एंबेसडर हैं। वे पर्यावरण के लिए काम करते हैं। सुशील कई अभियानों से जुड़े हैं। इनमें गौरैया संरक्षण अभियान चम्पारण, चंपा से चम्पारण अभियान, गांधी बचपन संवारो शिक्षा केन्द्र शामिल हैं।  अब वे एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और खुद को सेलेब्रिटी नहीं मानते हैं। सुशील कुमार ने अब लाइमलाइट से दूर अपनी जिंदगी का मकसद ढूंढ लिया है। वृक्षारोपण मूवमेंट के लिए काम करना, लोगों की सेवा करना, पर्यावरण को दुरुस्त रखना ही उनका उद्देश्य बन गया है।

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