500 पशु-चिकित्सक, सहायक की तुरंत भर्ती

राजस्थान में गायों को लंपी के कहर से बचाने के लिए सरकार वेटरनरी डॉक्टर्स और पशुधन सहायक के 500 पदों पर भर्ती करने जा रही है।  राज्य में अबतक 6 लाख से ज्यादा गाय इस वायरस से संक्रमित हो चुकी हैं। करीब 26 हजार ने दम तोड़ दिया है। यह सरकारी रिकॉर्ड का आंकड़ा है।

30 जिलों के गौवंश-पशु लंपी की चपेट में आने के बाद सरकार कोरोना की तर्ज पर तत्काल-अस्थाई रुप से वेटरनरी डॉक्टर्स और पशुधन सहायक के 500 पदों पर भर्ती करेगी। वेटेरनरी डॉक्टर्स की नियुक्ति 39,300 रुपए प्रति माह पर केवल 3 महीने के लिए होगी।

20 से 40 साल तक के डॉक्टर्स इसके लिए आवेदन दे सकते हैं। 24 और 25 अगस्त को पशुपालन विभाग में कैंडिडेट्स को आवेदन के साथ बुलाया गया है। इसी तरह 300 पशुधन सहायकों को भी अस्थाई रुप से लगाया जाएगा। 19 मार्च को 1136 पदों पर शुरू हुई पशुधन सहायक भर्ती के पदों में बढ़ोतरी करते हुए इसे 1436 किया गया है। साथ ही अजमेर, भरतपुर और बूंदी में गायों को गोटा-पॉक्स वैक्सीनेशन शुरू कर दिया गया है।

पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा- ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। अधिकारी फील्ड में रहें और हर हालात पर नजर रखें। राज्य सरकार जल्द 1 हजार 436 पशुधन सहायक (एलएसए) को नियुक्त कर रही है। तत्काल अस्थाई आधार पर 300 एलएसए और 200 वेटेरनरी डॉक्टर की नियुक्ति जल्द कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग के सभी ऑफिस सरकारी छुट्टी के दिनों में भी खुले रखने के निर्देश दे दिए गए हैं। ब्लॉक और जिला स्तर पर 24 घंटे कंट्रोल रूम चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों को गौशालाओं और प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा करने को कहा है। गौशालाओं में साफ-सफाई, संक्रमित पशुओं के आइसोलेशन सेंटर, दवाइयों की उपलब्धता, मरे हुए पशुओं के निस्तारण, जागरूकता गतिविधियों सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की गई है। उरमूल डेयरी की भी मदद ली जाएगी।

पशुपालन विभाग के सचिव पीसी किशन ने कहा- 25 लाख वैक्सीन की जरूरत आंकी गई है। प्रदेश में 10 लाख 70 हजार वैक्सीन का ऑर्डर दिया गया है। उसमें से 5 लाख से ज्यादा वैक्सीन आ चुकी हैं। अजमेर, भरतपुर, बूंदी में टीकाकरण शुरू किया गया है। जहां पर ज्यादा वायरस संक्रमण है, वहां फिलहाल टीकाकरण नहीं किया जा सकता है। अभी केन्द्र ने गोट पॉक्स वैक्सीन भेजी है। यह लगभग 60 फीसदी प्रभावी है। यह वैक्सीन एक तरह से वैकल्पिक व्यवस्था है। क्योंकि लंपी की वैक्सीन अब तक नहीं आई है। गौवंश की ज्यादातर मौत का कारण लंपी संक्रमण के अलावा एंटी बायोटिक का हैवी डोज, झोलाछाप डॉक्टर और बिना सुपरविजन के टीकाकरण करना है।

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