रेल पुल विस्फोट के तीन आरोपी पकड़े

उदयपुर के ओढ़ा में रेलवे ब्रिज पर ब्लास्ट करने के मामले में एटीएस ने गुरुवार को बड़ा खुलासा किया। एटीएस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। इनको उदयपुर के एकलिंगपुरा गांव से पकड़ा गया है। साजिश में इनके साथ और कौन शामिल था, उनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। एटीएस ने दावा किया कि अब तक की पूछताछ में आरोपियों ने जमीन अधिग्रहण का पैसा नहीं मिलने को लेकर ब्लास्ट करने की बात कबूली है।

एटीएस-एसओजी नक्सली घटना कि एंगल से भी जांच कर रही थी, लेकिन अब पूरा मामला ही बदल गया है। स्थानीय लोग रेलवे ब्रिज बनने के समय जमीन अधिग्रहण का पैसा नहीं मिलने से नाराज थे। एटीएस-एसओजी एडीजी अशोक राठौड़ ने गुरुवार शाम को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्लास्ट मामले में गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फूलचंद, विष्णु और प्रकाश को पकड़ा गया है। तीनों उदयपुर के जावर माइंस के एकलिंगपुरा के रहने वाले हैं। अभी तक की पूछताछ में आरोपियों ने कहा है कि उनका उद्देश्य जनहानि का नहीं था। डूंगरपुर में मिली जिलेटिन की छड़ का इस घटना से कोई कनेक्शन नहीं है।

उल्लेखनीय है कि 12 नवंबर शनिवार की रात करीब 11 बजे उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे लाइन पर बने ट्रैक पर अज्ञात लोगों ने ब्लास्ट कर दिया था। इससे पटरियों पर क्रैक आ गया। मौके पर बारूद भी मिला था। बदमाशों की साजिश पुल को उड़ाने की थी। धमाके से चार घंटे पहले ही इस ट्रैक से ट्रेन गुजरी थी। घटना के बाद अहमदाबाद से उदयपुर आ रही ट्रेन को डूंगरपुर में रोक दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर को ही इस लाइन का लोकार्पण किया था।

पूछताछ में सामने आया कि तीनों युवकों की उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे लाइन के पास जमीन थी। ट्रैक बनाने के लिए तीनों की जमीन का अधिग्रहण हुआ था। इस दौरान इन्हें मुआवजा भी कम मिला था। इसीसे वे नाराज चल रहे थे। इसका बदला लेने के लिए तीनों ने ट्रैक उड़ाने की साजिश रची। इस घटना के बाद से तीनों आरोपी मोबाइल बंद कर उदयपुर के सविना में छिपे थे। आरोपियों ने उदयपुर से ही ब्लास्ट का सामान डेटोनेटर और वायरिंग आदि की जानकारी जुटाई थी। जब पीएम मोदी ने रेल का संचालन शुरू किया था, उसी दिन से आरोपियों ने ट्रैक को उड़ाने की प्लानिंग कर ली थी।

पुलिस ने तीनों आरोपियों को उदयपुर के एकलिंगपुरा से पकड़ा है। आरोपियों ने 2 साल पहले भी रेलवे के अधिकारियों को पुल उड़ाने की धमकी दी थी। एटीएस-एसओजी की पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने रेलवे लाइन में जमीन अधिग्रहण को लेकर भी आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी थी।

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