झांसी में गगनयान की सुरक्षा का टेस्ट

विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने झांसी के पास बबीना में सेना के गगनयान पैराशूट सिस्टम की जांच की है। टेस्टिंग के लिए बबीना फील्ड फायरिंग रेंज को चुना गया था। टेस्ट का नाम था इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (आईएमएटी)। इस टेस्ट में पैराशूट की ताकत और क्षमता का परीक्षण किया गया, ताकि भविष्य में गगनयान के क्रू मॉड्यूल की लैंडिंग के समय दिक्कत न हो। 

ऐसा नहीं है कि गगनयान में सिर्फ यही तीन पैराशूट रहेंगे, लेकिन ये तीनों मुख्य पैराशूट हैं। इसके अलावा इसमें तीन छोटे एसीएस, पायलट और ड्रोग पैराशूट भी लगाए जाएंगे। ताकि क्रू मॉडयूल को सही दिशा में लाकर उसकी गति को तय मानकों तक कम किया जा सके। आईएमएटी में यह देखा गया कि अगर एक पैराशूट खराब हो जाता है, तो क्या दो पैराशूट मिलकर इस मॉड्यूल को सही सलामत उतार पाएंगे। इसलिए यह इंटीग्रेटेड पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट किया गया था। 

परीक्षण के दौरान इन पैराशूट की मदद से 5 टन का डमी वजन जमीन पर लैंड कराया गया। मतलब, यह उतना ही वजन था, जितना गगनयान के क्रू मॉड्यूल का है। इस टेस्ट के लिए भारतीय वायुसेना के आईएल-76 एयरक्राफ्ट की मदद ली गई थी। पैराशूट को ढाई किलोमीटर ऊपर से गिराया गया था। इस टेस्ट के दौरान दो छोटे पाइरो-बेस्ड मोर्टार पायलट पैराशूट छूटे। इसके सात सेकेंड बाद दोनों मुख्य पैराशूट खुल गए। ये पूरा परीक्षण सिर्फ 2 से 3 मिनट का था।

इस परीक्षण के दौरान इसरो के वैज्ञानिक पूरे समय पैराशूट लैंडिंग के सभी चरणों के डेटा जमा कर रहे थे। यह टेस्ट इसरो, डीआरडीओ, वायुसेना और भारतीय सेना की मदद से पूरा हुआ। पैराशूट टेस्टिंग के दौरान एक्सट्रैक्शन, इजेक्शन, स्पीड में कमी सेट करने वाले सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन और एवियोनिक्स की जांच की गई। सभी स्टेजेस ने सही से काम किया। परीक्षण शुक्रवार को किया गया था। 

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