हत्यारों की रिहाई को चुनौती देगी कांग्रेस

सुप्रीम कोर्ट की ओर से राजीव गांधी के हत्यारों को रिहाई देने के मामले में कांग्रेस पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। कांग्रेस ने पहले केंद्र सरकार की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन के अंतर्गत हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने की बात कही थी, लेकिन अब पार्टी  की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के सभी दोषियों की रिहाई के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। 

केंद्र सरकार ने 17 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के सभी 6 दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की है। केंद्र सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़े अन्य पक्षों को सुने बिना ही दोषियों की समय पूर्व रिहाई का फैसला दे दिया।

सरकार ने न्यायिक प्रक्रिया संबंधी खामी को उजागर करते हुए अपनी याचिका में कहा कि इस मामले का आवश्यक पक्ष होने के बावजूद उसे अपनी बात कहने का कोई उपयुक्त अवसर नहीं दिया गया है। केंद्र ने कहा कि दोषियों ने सजा पर पुनर्विचार करने की याचिका के समय केंद्र सरकार को पक्षकार नहीं बनाया, इसीलिए इस मामले से जुड़े अहम सुबूत और पहलू सुप्रीम कोर्ट के सामने आने से रह गए। अगर ऐसा किया गया होता तो इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से एकदम सटीक और उपयुक्त फैसला आता।

उल्लेखनीय है कि विगत 11 नवंबर को सर्वोच्च अदालत ने नलिनी श्रीहरन समेत 5 दोषियों को जेल से रिहा कर दिया था। एक अन्य दोषी पेरारीवलन को रिहा करने का सुप्रीम कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका था। कोर्ट ने दोषियों की रिहाई का आदेश देते हुए कहा था कि, तमिलनाडु सरकार ने पहले राज्यपाल से हत्यारों की रिहाई की सिफारिश की थी। चूंकि राज्यपाल की ओर से इस मामले में कोई फैसला ​नहीं लिया जा रहा, अत: हम ही कर देते हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राजीव गांधी हत्याकांड के सभी दोषियों का जेल में आचरण अच्छा पाया गया। साथ ही सभी ने जेल में रहने के दौरान कई डिग्रियां भी हासिल कीं। शीर्ष अदालत ने इस आधार पर एस. नलिनी, जयकुमार, आरपी रविचंद्रन, रॉबर्ट पियास, सुथेंद्रराजा और श्रीहरन को रिहा करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 18 मई, 2022 को पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में पेरारिवलन 30 साल से अधिक की सजा काट चुका था। अन्य दोषी भी 30 साल तक जेल में रहे। इन सभी को मौत की सजा हुई थी। बाद में इसे आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बुदुर में एक जनसभा के दौरान आत्मघाती बम विस्फोट में हत्या कर दी गई थी।

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