लॉबिंग में अरबों खर्च कर पाए वैक्सीन के ठेके

दवा कंपनियां किस तरह लोगों की जान की कीमत पर पैसे की भूख मिटाती हैं, इसका शर्मनाक खुलासा हुआ है। कोरोना प्रकोप में जब लोग जान बचाने के लिए अस्पताल दर अस्पतालठोकर खा रहे थे,तभी कुछ नामी दवा कंपनियां नेताओं पर अरबों रुपए उड़ा रही थीं, ताकि नेता उन्हें दवाई और कोरोना वैक्सीन से बेहिसाब कमाई करने दें।

नतीजा ये रहा कि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के नाम पर वैक्सीन बनाने का अधिकार इन कंपनियों तक सीमित रखा गया। बाद में इन्हीं कपंनियों को वैक्सीन बनाने का ठेका मिला जो पहले से लोगों की जान के साथ खेलती रही हैं और अरबों रुपए का जुर्माना भर चुकी हैं। ये वैक्सीन कंपनियां हैं फाइजर और जॉनसन एंड जॉनसन। इनके अलावा 3 फार्मा कंपनियां भी ऐसी ही बेईमानी के लिए बदनाम हैं।

बात इसी साल 24 फरवरीकी है। उस समय कोरोना दिन दूनी और रात चौगुनी रफ्तार से फैल रहा था। पूरी दुनिया में वैक्सीन की मांग की जा रही थी। भारत और दक्षिण अफ्रीका विश्व व्यापार संगठन (डब्लूएचओ) के पास ये प्रस्ताव लेकर गए कि मेडिकल की दुनिया के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी वाले नियमों में थोड़ी ढील मिल जाए तो वैक्सीन बनाने में देरी न होगी।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसारइस प्रस्ताव को रोकने के लिए अमरीकी फार्मा कंपनियों के संगठन ‘द फार्मास्यूटिकल रिसर्च एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ अमेरिका’ ने महज कुछ दिनों में 50 मिलियन डॉलर, (3 हजार 700 करोड़ रुपए से अधिक) नेताओं की लॉबिंग में खर्च कर दिए। इन दवा कंपनियों की मजबूत लॉबिंग की वजह से भारत का प्रस्ताव लागू नहीं हो पाया।

डब्लूएचओने अगर ये प्रस्ताव उसी वक्त पास कर दिया होता तो इसका सीधा फायदा विकासशील और कमजोर देशों को मिल गया होता। मतलब, वैक्सीन के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की लिस्ट से बाहर आते ही ट्रॉयल कर चुकीं सभी कंपनियों को फॉर्मूला दूसरे देशों के साथ शेयर करना पड़ता। फिर सभी देश अपने लोगों के लिए खुद ही वैक्सीन तैयार कर चुके होते। तब गरीब देशों में भी सभी लोगों को वैक्सीन देना आसान होता।

वैक्सीन बनाने का ठेका पाने वाली कंपनियों पूर्व में गड़बड़ियों के लिए दंडित की जा चुकी हैं। इनमें से एक फाइजर और इसकी सहायक कंपनी फर्माशिया एंड अपजॉन ने 2005 में भी लोगों की जिंदगी ताक पर रखकर गलत तरीके से बेक्स्ट्रा दवा को बाजार में उतार दिया था। जब लोगों ने इसके बारे में शिकायत की तो इस दवा को कंपनी ने वापस ले लिया था।इसी प्रकार अब तक सिंगल डोज वैक्सीन बनाने का दावा करने वाली जॉनसन एंड जॉनसन की टीका अमेरिका के लोग लगवा रहे हैं। साइड इफेक्ट की शिकायतों पर काफी बवाल मच चुका है। एक अन्य दवा कंपनी ‘ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (जीएसके)’ है। इस कंपनी पर आरोप था कि बिना सही से जांचे-परखे पैक्सिल और वेलब्यूट्रिन जैसी दवाओं को लेकर ‘ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (जीएसके)’ ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन को गलत रिपोर्ट दी।यही नहीं, कंपनी ने इन दवाओं का गलत प्रचार भी किया। सरकार को कीमत के बारे में गलत जानकारी दी गई।वहीं, दुनिया की बड़ी दवा कंपनी टाकेडा को अपने किए के लिए 2.4 बिलियन डॉलर का जुर्माना चुकाना पड़ा है। टाकेडा पर आरोप था कि कंपनी ने ब्लड शुगर दवा ‘पियोग्लिटाजोन’ के बुरे प्रभावों को बताए बिना दवा का धड़ल्ले से प्रचार और बिक्री की। 2012 में एबॉट लेबोरेटरीज नाम की एक इंटरनेशनल दवा कंपनी को भी गलत तरह से दवा बेचने के आरोप में जुर्माना भरना पड़ा था। फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी के अनुसारकंपनी ने डेपाकोट नाम की दवा को गैरकानूनी तरीके से बेचा था। इस दवा से लोगों पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव के बारे में भी कंपनी ने जानकारी नहीं दी थी।

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