कर्नल बैसला की देह पंचतत्व में विलीन

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का आज देर शाम उनके उनके पैतृक गांव मुंडिया (करौली) में अंतिम संस्कार हुआ। इसके साथ ही उनकी पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हो गई। उनके अंतिम दर्शन करने दस जिलों से हजारों लोग, मंत्री-विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, समाज के पदाधिकारी मुंडिया गांव पहुंचे।

बैंसला को अंतिम विदाई देने किसान नेता राकेश टिकैत, दिल्ली के उपनेता प्रतिपक्ष रामवीर विधुड़ी, टोंक सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, मंत्री शकुंतला रावत, विधायक जोगेंद्र अवाना, जयपुर हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर, बीज निगम चेयरमैन धीरज गुर्जर, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ समेत कई राजनीतिक सामाजिक हस्तियां मुंडिया गांव पहुंचीं। अंत्येष्टि स्थल पर हजार लोगों के मौजूदगी में कर्नल की अंत्योष्टि हुई।

बैंसला का गुरुवार को निधन हो गया था। जयपुर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार को कर्नल बैंसला की शवयात्रा जयपुर के वैशाली नगर से सुबह छह बजे  शुरू हुई। सेना के फूलों से सजे ट्रक में कर्नल की पार्थिव देह को मुंडिया लाया गया। करीब 150 किलोमीटर के इस सफर में जगह-जगह बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद रहे और कर्नल जिंदाबाद के नारे लगाए।

कर्नल बैंसला 1971 भारत-पाक युद्ध में युद्ध बंदी भी रहे थे। 1991 में सेना से रिटायर होने के बाद समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हो गए। गुर्जर समाज की आरक्षण की मांग को लेकर बनी संघर्ष समिति का 2005 में उन्हें संयोजक बनाया गया। उनके नेतृत्व में गुर्जरों को आरक्षण दिलवाने की मुहिम को तेज हुई तो 2007 में पाटोली-पीपलखेडा व पीलूपुरा बयाना के चर्चित आंदोलन सुर्खियों में रहे। कई आंदोलनों के बाद राजस्थान के गुर्जर समाज को एमबीसी का 5 फीसदी आरक्षण दिलवाने में कर्नल की प्रमुख भूमिका रही।

किरोड़ी सिंह के एक इशारे पर गुर्जर समाज एकजुट हो जाता था। उनकी ताकत इतनी थी कि एक अपील पर पूरा राजस्थान रुक जाता। वो वसुंधरा राजे से लेकर अशोक गहलोत सरकार तक अपनी ताकत का अहसास कई बार कर चुके थे।

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