सिर्फ मंत्री शेखावत पर शिकंजा, बाकी को अभयदान

राजस्थान के विधायक खरीद-फरोख्त मामले में राज्य की गहलोत सरकार, केन्द्र सरकार जैसा बर्ताव कर रही है। जिस प्रकार केन्द्र की भाजपा सरकार ने अपनों को राहत औऱ विपक्षियों पर आफत की नीति अपनाई है, ठीक उसी तरह की रुख गहलोत सरकार ने इस सियासी मामले में अपनाया है। उसने केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत पर तो शिकंजा कसने की पूरी तैयार की, लोकिन इस मामले दो अन्य आरोपी मंत्री विश्वेन्द्र सिंह औऱ कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा को अभयदान देने का मन बनाया है।  

इस रणनीति के तहत राजस्थान की एसीबी टीम दो साल बाद केंद्रीय मंत्री शेखावत तक पहुंची औऱ कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए उनको नोटिस तामील करवाया है। शेखावत के साइन भी ले लिए गए और अब उन्हें 15 जुलाई को एडीजे फर्स्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा। फिर कोर्ट तय करेगा कि शेखावत अपना वाइस सैंपल दें या नहीं।

शेखावत को नोटिस देने का घटनाक्रम दिलचस्प है। आमतौर पर सिपाही को नोटिस तामील करवाने के लिए भेजा जाता है, लेकिन इस मामले में एएसपी के नेतृत्व में पूरी टीम बनाई गई। तय किया गया कि नोटिस शेखावत के घर के बाहर नहीं चिपकाना है, उनके हाथ में देकर साइन लेने हैं। इसके लिए एसीबी की टीम ने 3 दिन तक दिल्ली में डेरा डाले रखा। इस मामले में राज्य के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह व कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा का भी नाम था, लेकिन एसीबी ने नोटिस सिर्फ शेखावत को दिया है।

एसीबी के अचानक सक्रिय होने को संबंध में पता चला है कि 20 दिन पहले हुई एक बैठक में सरकार की ओऱ से एक बड़े अधिकारी को ताना देने पर एसीबी सक्रिय हुई। उसके बाद मंत्री शेखावत को नोटिस देने के लिए पूरा एक्शन प्लान बनाया गया।

सरकार की नाराजगी के बाद एसीबी सक्रिय हुई और एडीजे कोर्ट फर्स्ट से गजेंद्र सिंह के नाम का नोटिस निकलवाने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद एडिशनल एसपी गौरी शंकर के नेतृत्व में टीम बनाई, जिसे नोटिस मंत्री तक पहुंचाने का जिम्मा दिया। एसीबी ने 13 जून को लोकेशन पता की तो जानकारी मिली कि शेखावत दिल्ली में हैं। 14 जून को एक टीम दिल्ली रवाना हुई। 14 जून से लेकर 15 जून की शाम तक मंत्री के दफ्तर से बार-बार मिलने का समय मांगा गया, लेकिन मुलाकात के लिए समय नहीं मिल सका।

एसीबी टीम मंत्री को घर पर नोटिस देने या चस्पा करने से बच रही थी। 16 जून की सुबह शेखावत के स्टाफ में लगे एक अन्य व खास अधिकारी से अनुरोध किया गया तो उसने मिलवाने का वादा किया। उसी दिन दोपहर बाद ध्यानचंद स्टेडियम स्थित दफ्तर में एसीबी ने शेखावत को हाथ में नोटिस दिया और उनके साइन लिए। इसके बाद सबूत के तौर पर नोटिस पर मंत्री के साइन की फोटो वॉट्सऐप से बड़े अधिकारियों को भेजी गई।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के खेमों की बाड़ाबंदी के दौरान 15 जुलाई, 2020 को 3 ऑडियो क्लिप मीडिया को वॉट्सऐप किए गए थे। दावा किया कि विधायकों की खरीद-फरोख्त से संबंधित बातचीत की ये आवाजें गजेंद्र सिंह शेखावत और विधायक विश्वेंद्र सिंह व भंवरलाल शर्मा की हैं।

इन ऑडियो क्लिपिंग्स को तत्कालीन मुख्य सचेतक और वर्तमान में जलदाय मंत्री महेश जोशी ने 17 जुलाई, 2020 को एसीबी को सौंपा और इनके आधार पर गजेन्द्र सिंह, भंवरलाल शर्मा, विश्वेन्द्र सिंह व अन्य के खिलाफ एसीबी में मामला दर्ज हुआ। इसी मामले में अब केंद्रीय मंत्री शेखावत को नोटिस दिया गया है।

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