झुंनझुंनवाला का राजस्थान से रहा गहरा जुड़ाव

द बिग बुल, द किंग ऑफ दलाल स्ट्रीट, शेयर मार्केट के बेताज बादशाह जैसे कई नामों से मशहूर राकेश झुनझुनवाला रहते तो मुम्बई में थे, लेकिन उनकी जड़े राजस्थान के झुंझुनूं जिले से जुड़ी हुई हैं। इसलिए इनका परिवार अपने नाम में झुनझुनवाला सरनेम लगाता है। इनका परिवार मारवाड़ी अग्रवाल बनिया है। उन्होंने 62 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 5 जुलाई 1960 को जन्‍मे राकेश ने आज मुम्‍बई में अंतिम सांस ली।

असल में, राजस्थान में कई लोगों के नाम के साथ खास सरनेम जुड़ा होता है, जो उनकी जाति की बजाय किसी जगह विशेष या परिवार के किसी खास सदस्य की पहचान होता है। जैसे सिंघानिया उद्योगपति मूलरूप से झुंझुनूं के सिंघाना कस्बे के हैं। पीरामल समूह ने पीरामल सरनेम अपने दादा सेठ पीरामल के नाम से ले रखा है। इसी तरह से राकेश का परिवार मलसीसर से कानपुर जाकर बसा तो इन्हें झुंझुनूं जिले के होने के कारण झुनझुनवाला कहा जाने लगा था, जो बाद में इनका सरनेम बन गया।

राकेश झुनझुनवाला मूलरूप से झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर दूर स्थित मलसीसर कस्बे के रहने वाले थे। मलसीसर से उनके दादा परिवार समेत उत्तर प्रदेश के कानपुर चले गए थे। वहां पर उन्होंने सिल्वर का कारोबार किया और सिल्वर किंग कहलाए।

राकेश के दादा और पिता का झुंझुनूं से गहरा लगाव था। यही कारण रहा कि पिता ने सबसे पहले अपना नाम राधेश्याम झुनझुनवाला रखा। इसी सरनेम को राकेश ने भी अपनाया। राकेश झुनझुनवाला और उनके छोटे भाई राजेश झुनझुनवाला के परिवार का भी झुंझुनूं से गहरा लगाव था। यही कारण था कि परिवार अक्सर कुलदेवी राणी सती के दर्शन के लिए यहां आता रहता था। राकेश झुनझुनवाला इसी साल जनवरी-फरवरी में यहां आए थे। राणी सती को अग्रवाल बनियों की कुलदेवी कहा जाता है। श्रीराणी सती मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सीए मनीष अग्रवाल ने बताया कि राकेश भी एक बार मंदिर आए थे। झुनझुनवाला परिवार हर साल मंदिर की वार्षिक पूजा में शामिल होता है। सेठ मोतीलाल कॉलेज के सचिव जीएल शर्मा बताते हैं कि यहां झुंनझुंनवाला की करीब 70-80 साल पहले हवेली हुआ करती थी, जिसे केडिया परिवार को बेच दी थी। अब उस जगह केडिया मार्केट बना है। अब उनकी झुंझुनूं में कोई संपत्ति तो नहीं है, लेकिन परिवार का जुड़ाव काफी है। 10-15 दिन पहले ही राकेश के भाई राजेश झुनझुनवाला डूंडलोद आए थे।

राकेश झुनझुनवाला का झुंझुनूं की जेजेटी यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रहा। पिता राधेश्याम झुनझुनवाला के साथ यूनिवर्सिटी की नींव रखने के लिए 15 फरवरी 2011 को राकेश भी झुंझुनूं आए थे। राकेश झुनझुनवाला का टीबड़ेवाला परिवार में ननिहाल है। जेजेटी यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन डॉ. विनोद टीबड़ा ने बताया कि राधेश्याम झुनझुनवाला ने यूनिवर्सिटी में मदद करने की बात कही थी। झुनझुनवाला परिवार झुंझुनूं के डूंडलोद में ट्रस्ट के जरिए लोगों की मदद करता है।

राकेश के भाई राजेश झुनझुनवाला सीए हैं। वे मोतीलाल ट्रस्ट के सभी शिक्षण संस्थाओं का काम देखते हैं। झुंझुनूं में भी सेठ मोतीलाल कॉलेज है। कॉलेज के सचिव जीएल शर्मा ने बताया कि राजेश लगातार डूंडलोद आते हैं। डूंडलोद झुंझुनूं शहर से 25 किलोमीटर दूर है। यहां डूंडलोद विद्यापीठ ट्रस्ट के जरिए झुनझुनवाला परिवार चैरिटी करता है।

राकेश झुनझुनवाला के पिता राधेश्याम झुनझुनवाला आईआरएस अधिकारी थे। हैदराबाद, कोलकाता व मुम्बई में आयकर आयुक्त के रूप में उन्होंने सेवाएं दी। हैदराबाद पोस्टिंग के दौरान 5 जुलाई 1960 को राकेश का जन्म हुआ।

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