एक ने खेजड़ी, दूसरी ने ठाकुरजी से की शादी

राजस्थान में शादी को लेकर दो युवतियां चर्चा में आ गई हैं। रूस की तान्या ने कुंडली में मंगल दोष के कारण खेजड़ी के पेड़ से शादी की। वहीं, पूजा सिंह ने मंदिर में विराजे ठाकुरजी से शादी कर ली। 

प्रदेश में खेजड़ी से शादी आम बात है, लेकिन लोग तब हैरान हुए जब विदेशी युवती तान्या कारपोवा ने खेजड़ी के पेड़ से शादी की। 28 वर्षीय तान्या ने गत 7 दिसंबर को उदयपुर में खेजड़ी के पेड़ से विवाह किया। तान्या भारत घूमने आई हैं। आगरा में उसे किसी ज्योतिषी ने लग्न कुंडली में मंगल दोष बताया था। कहा था कि इसी वजह से उसे योग्य लड़का नहीं मिल पा रहा और शादी में अड़चन आ रही है। पीपल या खेजड़ी के पेड़ से शादी में इस दोष का निवारण सुझाया था। तान्या ने उदयपुर में सूरजपोल के बाहर फतह स्कूल के सामने खेजड़ी के पेड़ से शादी की रस्म पूरी की। यह सब करवाने वाले पंडित हेमंत सुखवाल ने बताया कि दोष निवारण विधान को लेकर तान्या बहुत उत्साहित थी।

इधर, जयपुर जिले के गोविंदगढ का पास नरसिंहपुरा गांव में 30 साल की पूजा सिंह ने गांव के मंदिर में बिराजे ठाकुरजी से शादी कर ली। शादी में करीब 300 मेहमान आए। शादी के बाद पूजा अपने घर पर ही रहती है और ठाकुरजी मंदिर में। पूजा उनके लिए सवेरे भोग बनाकर ले जाती हैं। उनके लिए पोशाक बनाती हैं और शाम को दर्शन के लिए जाती है।

पूजा ने कहा, मेरी उम्र 30 साल हो चुकी है। अमूमन 20 से 25 साल की उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है। मेरे घर में भी इसकी सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी। रिश्ते आते रहते थे। लोग मेरे मम्मी-पापा को कहने लगे थे कि बेटी की अब तो शादी कर दो, लेकिन मेरा मन इसके लिए तैयार नहीं था। मैंने बचपन से ही देखा है कि बेहद मामूली बात पर पति-पत्नी के बीच झगड़े हो जाते थे, विवादों में उनकी जिदंगी खराब हो जाती थी। इनमें महिलाओं को बहुत ही बुरी स्थिति का सामना करना पड़ता था। बड़ी होते होते मैंने निर्णय कर लिया था कि मैं शादी नहीं करूंगी।

उसने आगे कहा, कॉलेज करने के बाद से ही मेरे लिए रिश्ते आने लगे। मम्मी-पापा भी जान पहचान वालों से कहते कि कोई अच्छा लड़का हो तो बताना। घर में इस तरह की बातें होने लगी कि बेटी है, बड़ी हो गई है, कब तक कुंवारी रखोगे। अब शादी कर दो, इन बातों से मैं परेशान होने लगी। मैं मम्मी-पापा को बता चुकी थी कि मुझे शादी नहीं करनी है, लेकिन यह इतना आसान नहीं था। वे यही कहते कि तुम्हारी शादी की उम्र हो चुकी है, अब तो शादी करनी ही होगी। बीच में कुछ लड़के वाले देखने भी आए, एक दो बार तो रिश्ता जैसे-तैसे टल गया, लेकिन जब बार-बार लड़के देखने आने लगे तो आखिर में मैंने देखने आने वालों को ही हाथ जोड़कर मना कर दिया और मेरी इच्छा बता दी।

तीस साल की पूजा सिंह पॉलिटिकल साइंस से एमए हैं। पिता प्रेमसिंह बीएसएफ से रिटायर हैं और मध्य प्रदेश में सिक्योरिटी एजेंसी चलाते हैं। मां रतन कंवर गृहणी हैं। तीन छोटे भाई हैं अंशुमान सिंह, युवराज और शिवराज। तीनों कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई कर रहे हैं। ठाकुरजी से विवाह का फैसला पूजा का खुद का था। शुरू में समाज, रिश्तेदार और परिवार के लोग इस पर सहमत नहीं हुए, लेकिन फिर मां ने बेटी की इच्छा का सम्मान कर सहमति दे दी थी। पिता न पहले राजी थे और न ही आज। इसीलिए शादी में भी नहीं आए। सारी रस्में मां ने ही पूरी की।

पूजा के इस विवाद के संबंध में आचार्य राकेश कुमार शास्त्री ने बताया कि भगवान विष्णु शालिग्राम जी से कन्या का विवाह शास्त्रोक्त है। जिस तरह से वृंदा तुलसी ने विष्णु भगवान का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए ठाकुरजी से विवाह किया है, यह ठीक वैसा ही है। पहले भी ऐसे विवाह होते आए हैं।

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