बढा आना-जाना

जयपुर में सरसंघ चालक इसबार किसी से नहीं मिले। मीडिया को भी दूर रखा। संघ के तमाम संगठनों के साथ बैंठकें की और निकल गए। दो दिन सेवा-भारती की बहुमंजिला इमारत में ही बिता दिए। छठी और सातवीं मंजिल के बीच। भूतल तो उन्होंने केवल आते-जाते देखा।

संघ प्रमुख से मिलने की कोशिश कुछ भाजपा नेताओं ने की। पर कामयाब नहीं हुए। पहले ही साफ कर दिया गया था कि मुखिया जी सिर्फ संघ के विभिन्न संगठनों की बैठक लेंगे। उनके प्रतिनिधियों से बात करेंगे, मंथन करेंगे- बस। किसी औऱ से मुलाकात नहीं करेंगे। अंदरखाने स्वयंसेवकों के साथ क्या चर्चा हुई, किसी को नहीं पता। मीडिया को बुलाया नहीं गया, लिहाजा खबरें प्रसारित नहीं हुई। एकाधा उत्साही खबरची सबों की नजरों से बचते-बचाते बैठक के स्थान तक पहुंच गए तो उन्हें स्वयं संघ प्रमुख ने दूर रहने का इशारा कर दिया। उसके बाद तो वहां न कोई झांका, न ही किसी ने कोई जानकारी दी। बिना ताक-झांक, घुसपैठ के बैठकें होती चली गईं। सरसंघ चालक फीडबैक लेते रहे, रणनीति बनाते रहे और भावी कार्यक्रमों का खाका तैयार करते रहे। सुना कि नवम्बर में तो संघ प्रमुख अपने चारों डिप्टियों, सेनापतियों के साथ गुलाबीनगर पधारने वाले हैं। किसी बड़ी योजना पर मंथन होगा यहां।

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