चुनाव के चलते सरकार ने थामे तेल के दाम

लगातार 83 दिनों से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। पिछले साल दिवाली पर मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आई थी। तब से अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमत लगभग स्थिर बनी हुई है।

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने की वजह उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को माना जा रहा है।

पिछले साल दिवाली से एक दिन पहले (3 नवंबर 2021) केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल की एक्साइज ड्यूटी में क्रमश: 10 रुपए/लीटर और 5 रुपए/लीटर की कटौती का ऐलान किया था। जिसका असर तुरंत ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी के रूप में सामने आया था। उस समय तेल की कीमत अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी थी और पेट्रोल 100 रुपये/लीटर को पार कर गया था और डीजल 100 रुपये/लीटर के करीब पहुंच गया था।

अब करीब ढाई महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमत दिवाली की कीमतों के आसपास ही ठहरी हुई हैं। इस साल जनवरी में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत करीब 30 फीसी बढ़कर 88 डॉलर/बैरल तक पहुंच गई हैं, जोकि 2014 के बाद से कच्चे तेल की सर्वाधिक कीमत है। एक्सपर्ट का मानना है कि यूएई के तेल ठिकानों पर हौती विद्रोहियों के हमले से उपजे विवाद और रूस-यूक्रेन विवाद के चलते कच्चे तेल की कीमत आने वाले महीनों में 100 डॉलर/बैरल तक जा सकती है।

कच्चे तेल के महंगे होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत ढाई महीने से ज्यादा समय से स्थिर बनी रहने की वजह पांच राज्यों में फरवरी-मार्च में होने वाले विधानसभा चुनावों को माना जा रहा है। यूपी में आखिरी चरण की वोटिंग 7 मार्च को होनी है, जबकि नतीजे 10 मार्च को आएंगे। ऐसे में चुनाव खत्म होते ही तेल की कीमतों का बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

कई एक्सपर्ट इसे यूपी, पंजाब समेत पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा द्वारा चला गया दांव मान रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार इस फैसले से सरकार को चालू वित्त वर्ष 2021-22 के बाकी बचे महीनों में 45 हजार करोड़ और सालाना आधार पर करीब एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। इसके बावजूद मोदी सरकार ने चुनावों को देखते हुए बड़ा रिस्क लिया है।

देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों से मोदी सरकार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से बचती रही है। चुनाव खत्म होते ही वह कीमतों को बढ़ाने में देर नहीं करती है। नवंबर 2021 से पहले तक कोरोना काल के दौरान केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कई गुना बढ़ा दी थी।

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