शुभ-अशुभ देख प्रचार करते योगी

गोरखपुर के साथ ही उत्तर प्रदेश की सभी सीटों पर भाजपा की जीत के लिए योगी आदित्यनाथ ग्रह-नक्षत्र पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। नामांकन हो या फिर जनसंपर्क; योगी आदित्यनाथ की कोशिश है कि शुभ-अशुभ समय को देख करके ही सक्रिय हुआ जाए।  शनिवार को योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में जनसंपर्क शुरू किया, यहां उन्होंने समय का ध्यान रखते हुए सुबह 10.35 पर संपर्क किया। उससे पहले योगी ने 10.15 बजे गुरुद्वारा और मंदिर में पूजा की। उसके बाद 10.40 के शुभ मुहूर्त पर लोगों से मुलाकात की। योगी ने जिन घरों को जनसंपर्क के लिए चुना था, वे पूर्व और उत्तर दिशा के थे, जो शुभ प्रवेश द्वार माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य राजेंद्र बहादुर श्रीवास्तव के अनुसार आज 10.30 बजे तक राहु काल था, जिसमें कोई शुभ काम नहीं किया जाता है। योगी ने पूर्व और उत्तर दिशा में स्थित मकानों को जनसंपर्क के लिए चुना, क्योंकि पूर्व दिशा सूर्य का प्रतीक है और उत्तर बुध का है। पूर्व और उत्तर ईशान कोण है। पांच अंक बुध से जुड़ा हुआ है। बुध सत्ता, तर्क, वाणी, चातुर्य का प्रतीक माना जाता है, जिसकी वजह से शीर्ष कुर्सी पर बैठना आसान होता है।

योगी आदित्यनाथ ने गोपाल मंदिर में भगवान कृष्ण और राधा की पूजा में भी विशेष ध्यान दिया। सरस्वती पूजन के दिन गोपाल मंदिर में पूजा के दौरान योगी आादित्यनाथ ने चंदन का इस्तेमाल किया। हालांकि, वह केवल गुरु गोरखनाथ को ही चंदन का लेप लगाते हैं। दूसरी जगहों पर पूजा के दौरान इसका इस्तेमाल करने से परहेज करते हैं। गोपालजी को लड्‌डू प्यारा है। इसलिए मोती चूर के लड्‌डू का भोग लगाया और कपूर के साथ ही धूप की आरती की, जिससे वातावरण शुद्ध होने के साथ ही शत्रुओं का नाश हो।

योगी आदित्यनाथ संसदीय चुनाव लड़ रहे हों या विधायकी का, वे प्रचार की शुरुआत पंजाबी कॉलोनी से ही करते हैं। राजनीति के लोग जहां इसकी वजह पंजाबियों द्वारा योगी को भक्त के रुप में दिए जाने वाला समर्थन मानते हैं। वहीं, ज्योतिष उन्हें रामगढ़ ताल से सटे होने से शीतल तासीर का चरित्र मानते हैं। योगी आदित्यनाथ पांच वर्षों के दौरान सात बार मोहद्दीपुर के इस मुहल्ले में आ चुके हैं।

योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर शहर की सीट से एक दिन पहले पर्चा भरा है। प्रर्चा भरने निकलने से पहले उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ पूजा पाठ किया। उनके तीन विशेष मंत्र रहे। पहले ‘शाबर-मंत्र’…इसके बारे में कहा जाता है कि इसे भगवान शंकर ने ही लिखा है, लेकिन उन्होंने माध्यम बनाया शिव भक्त गुरु गोरखनाथ और गुरु मत्स्येंद्र नाथ को। सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिस मंत्र से आज शुरुआत की, वह भगवान हनुमानजी का ऐसा ही शाबर मंत्र माना जाता है, जिसे सिद्ध कर लिया जाए तो दुश्मन आपको हरा नहीं सकता। दूसरा मंत्र यजुर्वेद से…जो क्षेत्र के कल्याण के लिए है। आसपास भी इससे सुख-शांति रहती है। योगी ने नामांकन के लिए निकलने से पहले इस मंत्र की पूरी साधना की। अंत में रुद्राभिषेक के मंत्र…योगी ने रुद्राभिषेक के मंत्रों का उच्चारण कर भगवान शिव की आराधना की। इस मंत्र के अलावा उन्होंने इस आराधना में मनोवांछित फल पाने के लिए सभी मंत्रों का उच्चारण किया। इन मंत्रों और पूरे विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक किया। इसमें पानी, शहद, मीठा, दूध और तेल से भगवान शिव की आराधना की।

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