मगरमच्छों के खौफ बीच नहाते, पानी भरते

फिल्मों की शूटिंग के लिए मशहूर राजस्थान के धौलपुर जिले के मध्य प्रदेश की सीमा से सटे राजघाट गांव में पानी की इतनी किल्लत है कि लोगों को मगरमच्छों से लड़कर चंबल नदी से पीने का पानी लाना पड़ता है। इस दौरान नदी से निकलकर मगरमच्छ लोगों को खींचने की कोशिश करते हैं। उनको लाठी-कुल्हाड़ी से मारकर पानी में वापस भगाने के लिए युवा चौकीदारी करते हैं। इसके बावजूद मगरमच्छ कई महिलाओं और बच्चों को अबतक खींचकर पानी की गहराई में ले जा चुके हैं, जिनके बाद में अवशेष ही मिले हैं। जान का खतरा होने के बावजूद मजबूरी ऐसी है कि मासूस बच्चे भी इन्हीं मगरमच्छों के बीच नहाते हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में ये गांव धौलपुर नगर पालिका में आता है, लेकिन यहां पानी, सड़क जैसी कोई सुविधा नहीं है। पानी की स्थाई व्यवस्था करने के बजाय जब भी कोई हादसा होता है तो सरकार मरने वाले के घरवालों को मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेती है।

गांव के लोगों पर मगरमच्छों के हमले की दो घटनाएं ही हालात की गंभीरता बयां करती  हैं। 7 साल का एक बालक सोनू नदी किनारे खेलने के बाद दोस्तों के साथ पानी लेने गया था। पानी भरते समय मगरमच्छ उसे पकड़ कर गहरे पानी में ले गया। चार घंटे बाद बालक के शव के क्षत-विक्षत अवशेष मिले। 40 साल की रामकली का पति रघुवीर 6 साल पहले नदी किनारे नहाने गया था। मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया। आज तक पति का सुराग नहीं लगा। अपने 6 बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी रामकली पर आ गई। बेबसी ऐसी है कि आज भी रामकली और उसके बच्चे उसी नदी से पानी लाते हैं।

अब गांव के युवा पानी लाते समय अपनों की सुरक्षा का जिम्मा उठाते हैं। लाठी-कुल्हाड़ी से पानी में होने वाली हलचल व आवाज सुनकर मगरमच्छ नदी के किनारे से गहरे पानी में चले जाते हैं। इससे मगरमच्छों के हमलों में कुछ कमी आई है, लेकिन कई बार गहरे पानी की तरफ जाने पर बच्चे मगरमच्छ का शिकार हो जाते हैं। गांव में सरकार ने हैंडपंप लगवाए थे, जो सालों से खराब हैं। गांव वालों का कहना है कि हैंडपंप लगने के कुछ महीनों बाद ही खराब हो गया। इसके बाद मरम्मत का काम नहीं हुआ।     (साभार-भास्कर)

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