वसुंधरा को नहीं छोड़ना होगा बंगला

राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनको राज्य सरकार की ओर से बंगला देने से जुड़ी याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। राजस्थान सरकार ने वसुंधरा राजे के पक्ष में उतरते हुए उन्हें बंगले आवंटन का हकदार बताया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने पक्षकार बनाए राज्य के मुख्य सचिव को भी अदालत की अवमानना से मुक्त कर दिया।

वसुंधरा राजे से 4 सितंबर 2019 से 1 अगस्त 2020 तक बंगले में रहने के लिए प्रतिदिन 10 हजार रुपए हर्जाना वसूलने की मांग की गई थी,जो आज कोर्ट के फैसले के बाद अब उन्हें नहीं देना पड़ेगा।

जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की डिवीजनल बेंच ने यह आदेश मिलापचन्द डांडिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जानबूझकर अवमानना नहीं हुई है। कोर्ट ने 8 मार्च को सुनवाई पूरी करते हुए याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट विमल चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट डिवीजनल बेंच ने आदेश में कहा- हाईकोर्ट की ओर से पिछले आदेश में पूर्व मुख्यमंत्री का बंगला खाली करवाने का कोई निर्देश नहीं था। कोर्ट ने पिछले आदेश में नोटिफिकेशन को भी रद्द कर दिया था। ऐसा कोई निर्देश भी नहीं दिया था कि वसुंधरा राजे बंगला खाली करें और उनसे पैनल्टी वसूली जाए। इसलिए यह न्यायालय की अवमानना नहीं है।

विमल चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने 4 सितंबर, 2019 को आदेश जारी कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने का प्रावधान रद्द कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बावजूद राज्य सरकार ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से बंगला खाली नहीं कराया। राजे से जनवरी 2020 में केवल सुविधाएं वापस ली गई हैं। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन ( एसएलपी) दायर की थी। इसे सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी को खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने अपनी सुविधाएं लौटाकर बंगला खाली भी कर दिया था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सिर्फ सुविधाएं लौटाईं ,लेकिन बंगले को खाली नहीं किया। उल्लेखनीय है कि वसुंधरा राजे को जयपुर में आवंटित 13 सिविल लाइंस बंगले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार मिलाप चंद डांडिया की ओर से अवमानना याचिका लगाई गई थी। इसमें कहा गया कि 4 सितंबर, 2019 को कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं देने के संबंध में किए गए प्रावधानों को रद्द कर दिया था। ऐसे में वसुंधरा राजे को सुविधा देना गलत है। इसके बाद अशोक गहलोत सरकार ने सितम्बर 2020 में राजस्थान हाईकोर्ट में अतिरिक्त शपथ-पेश किया। इसमें कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं देने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है। शपथ पत्र में सरकार ने साफ किया कि वसुंधरा राजे को वरिष्ठ विधायक होने के नाते बंगला दिया गया है। तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव स्वरूप की ओर से कोर्ट में पेश किए गए अतिरिक्त शपथ पत्र को लेकर यह आग्रह किया गया कि नए तथ्यों को हाईकोर्ट रिकॉर्ड में शामिल करें, जिससे अवमानना याचिका पर कार्रवाई को खत्म किया जा सके।

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