नए बदलाव डालेंगे जेब पर असर

शुक्रवार एक अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो रहा है। इसके साथ ही अहम बदलाव होने जा रहे हैं। जिसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।

नए वित्त वर्ष में आयकर के नियम में जो बदलाव हो रहा है, उसमें अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की सुविधा जरूरी है। जिस भी असेसमेंट ईयर का मामला है, उसके दो साल बाद अपडेटेड रिटर्न भरा जा सकता है। हालांकि, यह सुविधा सिर्फ उन करदाताओं को उपलब्ध होगी, जिन्होंने गलती से कम टैक्स भरा हो या करयोग्य आय की जानकारी छूट गई हो।

एक अप्रैल से भारत में क्रिप्टो भी करयोग्य होगा। क्रिप्टो से होने वाली आय पर 30 फीसदी टैक्स लगने वाला है। इसके अलावा क्रिप्टो रिलेटेड ट्रांजेक्शन पर एक फीसदी टीडीएस भी कटेगा। इसी तरह क्रिप्टो से हुए नुकसान को ऑफसेट करने की सुविधा भी नहीं मिलेगी।

राज्य सरकार के कर्मचारी अब नियोक्ता के एनपीएस कॉन्ट्रिब्यूशन पर ज्यादा डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे। बजट में वित्त मंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार के कर्मचारी भी अब बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता के 14 फीसदी के बराबर कंट्रीब्यूशन तक 80सीसीडी (2) क्लेम कर सकेंगे। इससे राज्य सरकार के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर लाभ मिलेगा।

आगे से कोरोना के इलाज के लिए कर नहीं देना पड़ेगा। कोरोना से होने वाली मौत पर 10 लाख रुपये की मिलने वाली रकम को कर दायरे के बाहर रखा गया है। सरकार ने दिव्यांग नागरिकों को भी मौका दिया है। अगर कोई व्यक्ति दिव्यांग है तो उसके अभिभावक बदले में इंश्योरेंस ले सकते हैं। इस पर उन्हें कर छूट का लाभ मिलेगा।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आयकर (25वां संशोधन) नियम 2021 को एक अप्रैल से लागू करने का फैसला किया है। इसके लागू होने से ईपीएफ में अब 2.5 लाख रुपये तक का कंट्रीब्यूशन कर मुक्त होगा। अगर आपके ईपीएफ खाते में कंट्रीब्यूशन 2.5 लाख रुपये तक का रहा तो ठीक, इससे ज्यादा कंट्रीब्यूशन होने पर इंटरेस्ट आय करयोग्य हो जाएगी।

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