भारत-नेपाल रेलसेवा फिर शुरू

आठ सालों के बाद भारत-नेपाल के बीच रेल सेवा आज से फिर शुरू हो गई। पीएम नरेंद्र मोदी और नेपाल के पीएम शेर बहादुर देउबा ने दिल्ली के हैदराबाद हाउस से हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। इससे पूर्व दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के बीच भी बातचीत हुई। यात्रियों के लिए यह रेल सेवा कल 3 अप्रैल से शुरू होगी।

इस ट्रेन के परिचालन से दोनों देश के बीच व्यापारी रिश्ता मजबूत होगा। 2014 से जयनगर-जनकपुर के बीच ट्रेन परिचालन बंद है। 2014 तक नेपाली नैरो गेज ट्रेन चली, लेकिन ट्रेनों का सफर काफी लंबा होने की वजह से कोयले की खपत ज्यादा होती थी। कोयले से चलने वाली ट्रेन काफी छोटी होती थी। इसकी वजह से लोग खिड़की और दरवाजों पर लटक कर सफर करते थे।

भारत-नेपाल के बीच बनी इस रेलवे लाइन के निर्माण में करीब 800 करोड़ रुपए की लागत आई है। जयनगर से बीजलपुरा और बर्दिबास तक 69.08 किलोमीटर परियोजना के अंर्तगत पहले चरण में करीब 34.9 किलोमीटर तक जयनगर से जनकपुरधाम-कुर्था रेलखंड पर ट्रेन का परिचालन शुरू हो रहा है। कुर्था से बिजलपुरा तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे रेलखंड का भी कार्य पूरा हो चुका है, जबकि नेपाल सरकार बिजलपुरा से बर्दिबास तक 16 किलोमीटर की रेलवे लाइन जल्द ही बनवाएगी।

भारत से नेपाल ट्रेन से जाने के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता नहीं रहेगी। हालांकि, यात्रा के दौरान भारत सरकार या फिर राज्‍य सरकारों की ओर से जारी फोटो पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा। यात्री पासपोर्ट के साथ भी नेपाल आ और जा सकेंगे। इस यात्री गाड़ी का विस्‍तार नेपाल के वरदीवास तक किया जाएगा। 65 से अधिक और 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के लोगों की उम्र और पहचान के लिए फोटोयुक्‍त पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सीजीएचएस कार्ड या राशन कार्ड आदि भी मान्‍य होंगे।

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