कृषि में ड्रोन का इस्तेमाल एक क्रांतिकारी कदम

— रंजना मिश्रा —

सरकार अब मोबाइल, कंप्यूटर और इंटरनेट की तरह ड्रोन के प्रयोग को भी आधुनिक जीवन का एक अंग बनाने की कोशिश कर रही है। ड्रोन को मिशन की तरह बढ़ावा दिया जाएगा। जैसे जल शक्ति मिशन के तहत घर-घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, वैसे ही ड्रोन शक्ति मिशन बनाया जाएगा, ताकि ड्रोन का इस्तेमाल सीमित न रहकर, रोजमर्रा के जीवन में हर जगह इसका इस्तेमाल किया जा सके। जवान से लेकर किसान तक इसका इस्तेमाल करेंगे, तब ड्रोन सीमाओं की सुरक्षा करने के साथ-साथ खेतों में फसलों की भी सुरक्षा करेगा। यह लोगों की जरूरत की चीज बन जाएगा। उद्योग से लेकर आपदा प्रबंधन में इसका प्रयोग किया जा सकेगा। ड्रोन शक्ति मिशन का अलग प्रतिष्ठान स्थापित किया जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसकी तैयारी कर ली है। अभी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान बनाई गई है, आगे फिजिकल प्रक्रिया को भी आसान बनाया जाएगा।

लक्ष्य अन्न सुरक्षा
जनसंख्या के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और क्षेत्रफल के हिसाब से सातवां बड़ा देश। ऐसे में इतनी बड़ी आबादी को अन्न सुरक्षा देना बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसलिए जरूरी है कि पारंपरिक खेती की बजाय आधुनिक और तकनीकी खेती का विस्तार हो। खेती की बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खेती को लाभकारी बनाने के लिए देश के कृषि वैज्ञानिक लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं, जिसमें उन्नत बीज, खाद और कीटनाशक के साथ कृषि उपकरण भी बनाए जा रहे हैं। ताकि तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर कृषि की लागत कम की जा सके, साथ ही उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाए।
कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल पर केंद्र सरकार काफी फोकस कर रही है। ड्रोन के जरिए खेती की कई समस्याओं, जैसे- फसलों में कहां रोग लगा है, कहां कीट लगे हैं, फसल में किस पोषक तत्व की कमी है, आदि का पता लगाया जा सकता है। समय पर बीमारियों का पता चलने से किसानों की इनपुट लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ सकेगा। ड्रोन में सेंसर और कैमरा जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी विशेषताएं होती हैं। लिहाजा इसका प्रयोग फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण, पौधों की वृद्धि की निगरानी, कीटनाशकों और पोषक तत्त्वों के छिडक़ाव के लिए भी किया जाएगा। ड्रोन से एक बड़े क्षेत्रफल में महज कुछ घंटों में ही कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव किया जा सकता है। जिससे किसानों की लागत में कमी आएगी, समय की बचत होगी और सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सही समय पर खेती में कीट प्रबंधन किया जा सकेगा। ज्ञात हो कि देश के विभिन्न राज्यों में पिछले साल टिड्डियों के हमले को रोकने के लिए पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था।

स्टार्टअप को बढावा
केंद्र की मोदी सरकार ने ड्रोन तकनीक को नवीनतम स्तर तक ले जाने के लिए कई प्रयास शुरू किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ड्रोन तकनीक से दक्ष कामगार तैयार करना एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। इसके लिए केंद्र सरकार इस साल ड्रोन सेक्टर में स्टार्टअप को बढ़ावा देगी। देश के युवा अगर ड्रोन उद्योग में शुरुआत करना चाहते हैं, तो केंद्र उनकी मदद करेगा। ऐसा अनुमान है कि देश में करीब 600 से 700 एग्रीटेक स्टार्टअप हैं, जो एग्री वैल्यू चेन के अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे हैं। ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई मोर्चों को कवर किया गया है। जैसे कृषि में ड्रोन के इस्तेमाल को प्रोत्साहन, स्टार्टअप को नाबार्ड के फंड के जरिए सहायता प्रदान करना आदि। इससे ड्रोन इंडस्ट्री नई ऊंचाइयों को छू सकेगी। बजट में ड्रोन टेक्नोलॉजी की क्षमता को पहचाना गया है। ड्रोन नियम 2021, ड्रोन इंडस्ट्री के लिए पीएलआई योजना और कृषि क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले ड्रोन के लिए अनुदान जैसे उपायों से कृषि क्षेत्र में तेजी आई है।
इस वर्ष के अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि सरकार पहले चरण में गंगा नदी के किनारे 5 किलोमीटर चौड़े गलियारों में किसानों की भूमि पर ध्यान केंद्रित करते हुए पूरे देश में प्राकृतिक जैविक खेती को बढ़ावा देगी। किसानों को डिजिटल और हाईटेक सेवाएं देने के लिए सरकार निजी कृषि प्रौद्योगिकी कंपनियों और कृषि मूल्य श्रंखला के अंशधारकों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और विस्तार संस्थानों की भागीदारी में पीपीपी मॉडल पर एक योजना शुरू करेगी। प्राकृतिक शून्य बजट और जैविक खेती, आधुनिक कृषि मूल्य संवर्धन और प्रबंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्यों को कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम को संशोधित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वित्त वर्ष 2022-23 के बजट प्रस्तावों में सीतारमण ने कई राहत भरी बातें कही हैं। उन्होंने किसानों को डिजिटल और हाई-टेक सेवाएं मुहैया कराने के लिए किसान ड्रोन का जिक्र किया। अग्रणी कृषि अनुसंधान और कृषि प्रशिक्षण संस्थानों को 8 से 10 लाख रुपए मूल्य के कृषि ड्रोन मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बदले में ये संस्थान देशभर में ड्रोन के छिडक़ाव का प्रशिक्षण देंगे। किसान जल्द से जल्द कृषि ड्रोन के इस्तेमाल के प्रति जागरूक हों, इसके लिए एफपीओ और कृषि इंटरप्रेन्योर्स सब्सिडाइज्ड दरों पर ड्रोन दिए जाएंगे, ताकि इनका इस्तेमाल बढ़ सके और देश का हर किसान इसका इस्तेमाल कर सके।

स्वदेशी तकनीक पर जोर
चुनिंदा संस्थानों में वैज्ञानिकों ने सेना से लेकर कृषि तक में प्रयुक्त होने वाले अनेकों ड्रोन तैयार कर लिए हैं। अब इन ड्रोन को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर तैयार करना है। अभी तक ड्रोन से जुड़े कई उपकरण विदेशों से खरीदने पड़ते हैं। सरकार ने अपनी नीति बदलाव कर ड्रोन संबंधी नियमों को आसान किया गया है। इसमें अधिक कागजी कार्यवाही नहीं है, और अगले 5 वर्षों में ड्रोन इंडस्ट्री आत्मनिर्भर हो जाएगी। जब ड्रोन की मांग बढ़ेगी तो उसमें लगने वाले उपकरणों का निर्माण भी शुरू हो जाएगा। वर्तमान में 60 फीसदी उपकरण देश में तैयार होने लगे हैं। डिजाइन का काम पूरी तरह देश के वैज्ञानिक कर रहे हैं। देश में ड्रोन क्षेत्र में सबसे अधिक काम आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक कर रहे हैं। वैसे आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास में भी काम हो रहा है। जल्द ही आईआईटी व अन्य तकनीकी संस्थानों में ड्रोन संबंधी कोर्स भी शुरू किए जा सकते हैं। इसको लेकर कई प्रस्ताव तैयार हुए हैं।
कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की कमी एक बहुत बड़ी समस्या है। ऐसे में ड्रोन के इस्तेमाल से खाद और कीटनाशक के छिडक़ाव में किसानों को मदद मिलेगी। उन्हें इस काम के लिए श्रमिकों को नहीं ढूंढना पड़ेगा। हालांकि शुरुआत में इसका लाभ सिर्फ बड़े किसान ही ले पाएंगे। अभी हाथ से खाद का छिडक़ाव करने पर इसकी ज्यादा मात्रा की जरूरत होती है, जिससे लागत में भी इजाफा होता है। ड्रोन से छिडक़ाव करने पर पैसों की बचत के साथ-साथ कीटनाशक का छिडक़ाव करने वाले के स्वास्थ्य पर भी खराब असर नही पड़ेगा। कुल मिलाकर ड्रोन के इस्तेमाल से भारत की कृषि में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलेगा।

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