उपभोक्ताओं को परेशान करता बीएसएनएल

भारतीय संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) अब उपभोक्ताओं को परेशान करने पर उतर आया है। जयपुर में एक मीडिया कार्यालय की फाइबर नेट सेवा करीब दो माह से गड़बड़ाई हुई है। गत 7 अप्रैल से तो बिलकुल ठप पड़ गई है। इस संबंध में जयपुर स्थित बीएसएनएल के उच्चाधिकारियों व क्षेत्रीय फ्रेंचाइजी से लेकर दिल्ली में दूरसंचार मंत्रालय तक गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन किसी भी स्तर पर उपभोक्ता को राहत देने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।

लगता है, बीएसएनएल को निजी हाथों में सौंपने की केन्द्र सरकार की मंशा के तहत उपभोक्ताओं को परेशान करने की रणनीति अपनाई जा रही है। ताकि वे निगम की सेवाएं त्यागने पर मजबूर हो जाएं औऱ सरकार उपभोक्ताओं की घटती संख्या का हवाला देकर खुद की मंशा पूरी कर सके।  

मीडिया कार्यालय की फाइबर नेट सेवा (फोन नं—0141-2946428) में अपलोडिंग स्पीड की समस्या करीब दो माह से बनी हुई है। दस दिन पूर्व बीएलएनएल के तकनीकी सहायकों ने आकर इसे ठीक किया। मगर 7 अप्रैल (गुरूवार) को समस्या फिर से उभर आई। उसी दिन मानसरोवर क्षेत्र की फ्रेंचाइजी—गोल्ड प्राइम को समस्या बताई गई। बीएसएनएल के जीएम-फाइबर राजीव यादव को फोन किया गया। निगम के पीजीएम कार्यालय को भी समस्या की जानकारी देकर जल्दी राहत दिलाने का अनुरोध किया गया। इसके बावजूद निगम से किसी तकनीकी सहायक को समस्या दूर करने नहीं भेजा गया।

गुरूवार को यादव के पीए अब्दुल राशिद ने उपभोक्ता से उसके फाइबर कनेक्शन का फोन नंबर लेकर समस्या ठीक कराने का आश्वासन दिया। मगर राहत न मिलने पर शुक्रवार को जीएम यादव से सम्पर्क किया गया। पहले तो उन्होंने कहा–निगम केवल आपकी समस्या नहीं देखेगा, उसे पूरा जयपुर देखना पड़ता है। फिर बोले, आप फोन नंबर लिखा दें, हम दिखवाते हैं। इसी प्रकार पीजीएम के पीए ने भी फोन नंबर नोट कर लिया, लेकिन कार्यवाही कुछ नहीं की गई। गोल्ड प्राइम के यहां गुरूवार को तो किसी ने फोन ही नहीं उठाया। शुक्रवार को बात करने पर एक महिला कर्मी ने नेट में आगे से समस्या होने की जानकारी दी। आज शनिवार को फ्रेंचाइजी के यहां से एक तकनीकी सहायक को भेजने की बात कही गई। गोल्ड प्राइम फ्रेंचाइजी बीएसएनएल के ही एक कर्मचारी की बताई जाती है।   

इस मामले में दिल्ली स्थित दूरसंचार विभाग की घोर उदासीनता भी सामने आई है। विभाग को गुरूवार से शनिवार के बीच तीन बार ट्वीट कर समस्या बताई गई है। मगर हर बार उसकी ओर से एक जैसा ट्वीट किया जा रहा है कि—आपका ट्वीट आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाता/विभाग को भेज दिया गया है। धन्यवाद। इधर, बीएसएनएल कार्पोरेट से भी उपभोक्ता को ट्वीट किए जा रहे हैं। एक ट्वीट में समस्या पर खेद जताया गया। दूसरे ट्वीट में कोई भी समस्या होने पर दो मोबाइल नंबरों पर सम्पर्क करने को कहा गया, लेकिन दोनों ही नंबर उन अधिकारियों के निकले, जो फाइबर नहीं, मोबाइल संबंधी मामलों में डील करते हैं। जब इस बारे में बताया गया तो बीएसएनएल कार्पोरेट ने दो नए अधिकारियों के मोबाइल नंबर दिए। किंतु इन नंबरों पर पिछले 24 घंटों से कॉल ही रिसीव नहीं किए जा रहे हैं।

बीएलएनएल द्वारा अपने उपभोक्ताओं को परेशानी में डालने का ये आलम तो तब है, जब हर महीने जारी होने वाले टेलीफोन तथा मोबाइल बिलों के भुगतान में तय तिथि से हफ्तेभर की देरी होने पर कनेक्शन काटने में पूरी मुस्तैदी दिखाई जाती है। मगर महीनेभर में नेट सेवा कितने दिन बाधित रहती है, इसे सेवादोष मानकर उपभोक्ता को राहत नहीं दी जाती है। मतलब, बीएसएनएल अपने बिल में सेवादोष अवधि की राशि माफ नहीं करता है। गोया कि, जबरा मारे औऱ रोने भी न दे।

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