मीडिया हित में एकजुट हों पत्रकार संघ

श्रमिक एवं गैर श्रमिक पत्रकार की सामाजिक सुरक्षा पर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए। वर्तमान में पत्रकार बहुत ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। उनको मीडिया मालिकों औऱ शासन दोनों ओऱ से निशाने पर लिया जा रहा है। ऐसे में तमाम पत्रकार संगठनों को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। तभी हम न्यायपालिका, कार्यपालिका औऱ मीडिया मालिकों को अपने हित में सोचने को मजबूर कर सकते हैं।

ये विचार आज यहां आल इंडिया फेडरेशन आफ पीटीआई एम्पलाइज यूनियन की एजीएम के उद्घाटन सत्र में फेडरेशन के महासचिव एम एस यादव ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा, मीडिया जगत में अब संविदा का बोलबाला है। मीडियाकर्मी बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। देश में केवल पीटीआई यूनियन ही है जो मजबूत एकता के चलते वर्षों से पत्रकार हित में संघर्ष कर रही है। यदि अन्य पत्रकार संगठन भी साथ मिलकर काम करें तो सुनियोजित तरीके से समाप्त की जा रही पत्रकार संस्था को न सिर्फ बचाया जा सकता है, बल्कि उसे पुनः प्रभावी भी बनाया जा सकता है।

सत्र के मुख्य अतिथि राजस्थान के जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी ने मीडिया को एक अदृश्य ताकत करार देते कहा कि यदि यह ताकत कमजोर होती है तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा।

उन्होंने कहा कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है।यद्यपि संविधान में ऐसे किसी स्तंभ का उल्लेख नहीं है, फिर भी मीडिया विधायिका, कार्यपालिका और न्यापालिका पर पैनी नजर रखता है। पिछले कुछ साल में इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के प्रसार से मीडिया की साख प्रभावित हुई है। किंतु आज भी पीटीआई एक ऐसा मीडिया संस्थान है, जो अपनी साख बरकरार रखे हुए है। पीटीआई की खबर में ‘मैनुपुलेशन’ नहीं चलता।

इस अवसर पर राजस्थान की समाज कल्याण बोर्ड अध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जिस प्रकार पत्रकारों ने गंगा नदी में बहती लाशों, अस्पताल में बेहाल लोगों की स्थिति और अन्य जगहों की खबरें कवर कर अपनी जान जोखिम में डाली, वे किसी कोविड वारियर्स की भूमिका से कमतर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि समाज को इसके लिए उनका सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज खबरों का स्वरूप बदला है। ऐसे बदले माहौल में पीटीआई जिस प्रकार साफगोई और निष्पक्षता से जनता के पक्ष में खबरें दे रही है, उसके लिए साधुवाद है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार मीडिया और मीडियाकर्मियों के हितों को लेकर सदा ही संवेदनशील रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत मीडिया से सतत संवाद को हमेशा प्राथमिकता देते हैं।

एजीएम में राजस्थान पत्रकार संघ (जार) के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा औऱ प्रेसवाणी के सम्पादक अनिल चतुर्वेदी ने भी सम्बोधित किया।

एक अन्य सत्र में राजस्थान के तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग ने कहा कि राज्य की गहलोत सरकार ने पत्रकारों सहित सभी कर्मियों के हित में काम करती है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण उसके द्वारा पुरानी पेंशन बहाल करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना करने का मीडिया का अधिकार बरकरार रहना चाहिए। आज ऐसा भी देखा जा रहा है जो दल सोशलमीडिया के माध्यम से सत्ता में आए, आज वे ही सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने के लिए कानून बना रहे हैं।

गर्ग ने कहा, लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है कि कर्मचारी यूनियन मजबूत रहे है। कोरोना महामारी के प्रकोप के दौरान रातों रात लोगों को नौकरी से हटा दिया गया, लेकिन समाज में कहीं से कोई आवाज़ नहीं उठी। यह बहुत चिंता की बात है।

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