फैंटेसी गेमिंग के कहर से कैसे बचें?

— आभा शर्मा

महाभारत के युग में शक्तिशाली और बुद्धिशाली पांड़वों ने जुए में अपना सब कुछ लुटा दिया था। राज-पाट, धन-वैभव और यहाँ तक कि अपनी पत्नी द्रौपदी तक को भी। जुए की लत इंसान को कंगाल बना देती है, विवेकशून्य कर देती है, यह तथ्य किसी से छुपा हुआ नहीं है। किंतु एक बार जो जुए या सट्टेबाजी की गिरफ्त में आ जाता है, इसके दलदल से निकलना आसान नहीं होता। वर्तमान में ये बुरी लत समाज में तेजी से फैल रही है। कोरोना महामारी के लॉकडाउन काल में ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो गेम उद्योग पूरी दुनिया में बढ़ा है। भारत भी इससे बच नहीं पाया है। बच्चों से लेकर बड़ों तक गेमिंग के जाल में उलझते जा रहे हैं।

इंटरनेट के बढ़ते प्रसार के साथ जुए के जिस नए स्वरूप से दुनिया रूबरू हुई है, उसे ऑनलाइन फैंटेसी गेमिंग के नाम से जाना जाता है। भारत में My 11 Circle, My Team 11, ड्रीम-11, Fan 2 Play और 11 wickets, Fortnite, Fifa,, विनजो, ऑनलाइन रमी, लूडो किंग, जंगली, MPL जैसे सैंकड़ों फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स बेहद लोकप्रिय हैं। हमारे यहां फैंटेसी गेमिंग को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं होने की वजह से इसका बढ़ता चलन एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है, खास तौर पर युवा और किशोर आयुवर्ग के लिए।

अफसोस ये है कि देश के लचर कानून और राज-पुरुषों की परोक्ष शह पाकर गेमिंग कंपनियां ‘खुला खेल फरुख्खाबादी’ खेलने पर उतर आईं हैं। तभी तो तमाम सिने व क्रिकेट स्टार्स विभिन्न फैंटेसी गेमों का बेखौफ प्रचार करते दिखाई दे रहे हैं। 

युवा पीढ़ी पर असर

बेहद चिंता की बात है कि देश में ऑनलाइन गेमिंग का युवा पीढ़ी की मनोदशा और स्वास्थ्य पर इसका विपरीत असर देखा जा रहा है। जैसे मिलने-जुलने की आदत खत्म होना, मोटापा, आँखों की बीमारियां, चिड़चिड़ापन आदि। ऐसे भी कई मामले सामने आये हैं, जहाँ इस लत ने लोगों को गंभीर आर्थिक संकट में पहुंचा दिया है। गेमिंग के लिए पैसे जुटाने के लिए युवा अपराध भी कर बैठे हैं या अवसाद में डूब कर आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं। राजस्थान में ही पिछले दिसंबर में एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें नागौर के एक 16 साल के किशोर ने अपने ही चचेरे भाई की हत्या कर दी थी। ऑनलाइन गेमिंग के दौरान आरोपी बालक ने कथित रूप से लाखों रुपये के ऑनलाइन गेम टोकन खरीदे और चुकाने के पैसे जुटाने के लिए खुद से छोटे अपने चचेरे भाई का अपहरण कर परिवार से फिरौती की कहानी रची। ये सिर्फ एक बानगी है। ऐसी घटनाएं देश के किसी न किसी हिस्से में घट रही हैं, जहाँ बच्चे और युवा ऑनलाइन गेमिंग की लत के चलते घरों में चोरी और अन्य अपराधों की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग के शिकार बच्चे अपनी भूख, प्यास और पढ़ाई भी भूल जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की एक अन्य घटना भी सबको याद होगी, जिसमें गेमिंग के जंजाल में  फँस जाने वाले एक बालक ने पहले पैसे जुटाने के लिए अपनी साईकिल बेच डाली और फिर खुद के अपहरण का ड्रामा किया, ताकि वो उस अपेक्षित राशि को हासिल कर पबजी नाम के गेम की अगली कड़ी तक पहुंच सके। ऐसी घटनाएं निश्चय ही चिंताजनक और दुखद हैं।

विज्ञापन मानकों का उल्लंघन

लोकप्रिय खिलाडिय़ों और रियलिटी शो के कलाकारों के सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोवर्स होते हैं। जब लोग, खास तौर पर युवा और बच्चे, उन्हें गैंबलिंग गेम का प्रचार करते देखते हैं, तो उनका प्रभावित होना स्वाभाविक है। भारतीय विज्ञापन मानक परिषद् ने क्रिकेट की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के विज्ञापनों पर चिंता जताई है, जिनमें कई लोकप्रिय क्रिकेटर धड़ल्ले से भाग ले रहे हैं। परिषद् द्वारा आईपीएल के पहले ही हफ्ते में 35 विज्ञापनों की स्क्रीनिंग के दौरान कम से कम 14 विज्ञापनों में मानकों का उल्लंघन पाया गया। टीवी और ओटीटी पर दिखाए गए इन विज्ञापनों में माय 11 सर्किल, फेयर प्ले, गेमीजी, विनजो, बेटवे, एमपीएल, जंगली रमी के विज्ञापन शामिल थे। इन विज्ञापनों में उपभोक्ताओं को जोखिम की जानकारी देने वाला अस्वीकरण बहुत ही कम देर के लिए फ्लैश किया गया, जबकि कायदे से वास्तविक धन वाले गेमिंग विज्ञापनों को नाबालिगों के लिए लक्षित नहीं किया जाना चाहिए। गेमिंग को आजीविका के स्त्रोत या सफलता के मानदंड से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इस तरह की गेमिंग में शामिल जोखिम के प्रति सावधान किया जाना तो बहुत ही जरूरी है, लेकिन अधिकतर विज्ञापनों में यह अस्वीकरण इस तरह से दिखाया जाता है कि पलक झपकते ही वह फ्लैश होकर गायब हो जाता है और दर्शक इसे देख नहीं पाते। यही नहीं सोशल मीडिया पर भी विज्ञापन मानकों के खुले उल्लंघन के मामले सामने आये हैं।

सिर्फ विज्ञापनों में मानकों का उल्लंघन हो रहा है, ऐसा नहीं है। आईपीएल में सट्टेबाजी बदस्तूर चल रही है, जिसमें करोड़ों रुपये दांव पर लगाए जाते हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में सट्टा खेलते कई लोग पकडे जा चुके हैं। अमेरिका और ब्रिटेन सहित यूरोप के अधिकतर देशों में सट्टेबाजी वैध है और हमारे देश के सटोरिये वहां की वेबसाइट्स का पॉसवर्ड यहाँ इस्तेमाल करते हैं। चूँकि पुलिस इन सर्वर तक नहीं पहुँच सकती, ये सटोरिये आसानी से बच निकल सकते हैं। किसी सख्त कानून, नियम या दिशा निर्देशों की कमी की चलते सट्टे का खेल बेरोकटोक चल रहा है।

ब्रिटिश फुटबॉलर्स पर रोक

कुछ ही दिनों पहले खबर आई है कि कमिटी फॉर एडवरटाइजिंग प्रैक्टिस (कैप) ने ब्रिटेन के नामी-गिरामी फुटबॉल खिलाडिय़ों और लव आइलैंड रियलिटी शो के स्टार्स द्वारा गैंबलिंग का प्रचार करने वाले विज्ञापन करने पर रोक लगा दी है। ये प्रतिबंध 1 अक्टूबर 2022 से लागू होंगे। कतर में आगामी अक्टूबर से शुरू होने वाले फुटबाल वल्र्ड कप आयोजन में बड़े स्तर पर जुआ और सट्टेबाजी की आशंका के चलते यह रोक लगाई गयी है। इसके तहत जुए का प्रचार करने वाले ऐसे सभी विज्ञापनों पर रोक लगायी गयी है, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को वीडियो या फोटो के जरिये जुआ खेलने का तरीका बताया जा रहा हो या वीडियो, गेमप्ले के जरिये प्रचार किया जा रहा हो। कैप द्वारा जुए के विज्ञापनों पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय लिया गया, ताकि करोड़ों युवा प्रशंसकों पर इसका दुष्प्रभाव न पड़े। क्योंकि लोकप्रिय खिलाडिय़ों और रियलिटी शो के कलाकारों के सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोवर्स होते हैं।

कौशल  या किस्मत का खेल

राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने ऑनलाइन गेमिंग पर नियमन की जरूरत का मुद्दा उठाया था, जिसमें उन्होंने कौशल या किस्मत का खेल सहित इससे जुड़े सभी मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बताई थी। इसे विडंबना ही कहेंगे कि ऑनलाइन गेमिंग कौशल आधारित है या सिर्फ किस्मत का खेल, इसको लेकर भारत के कानून में कोई स्पष्टता नहीं है। लिहाजा यह कहना मुश्किल है कि ऑनलाइन गेम खेलना वैध है या नहीं। भारतीय कानून की इसी खामी का ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां फायदा उठाकर बेहिसाब पैसा कमाने के साथ-साथ लोगों की जिंदगी बर्बाद करने में लगी हैं। दरअसल अभी भी देश में गेमिंग के बारे में नियम विक्टोरियन युग के पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 पर आधारित हैं, जिनके मुताबिक सट्टे और सार्वजनिक जुएखानों पर तो रोक का प्रावधान है, लेकिन ‘कौशल’ आधारित खेल इसके कार्यक्षेत्र से बाहर हैं। ये कानून उस युग के हैं, जब कम्प्यूटर का अस्तित्व नहीं था और ना ही कोई ऑनलाइन गेमिंग या मोबाइल सट्टेबाजी जैसी बातों की कल्पना कर सकता था। इसलिए सबसे पहले तो ऑनलाइन गेमिंग की स्पष्ट परिभाषा होना जरूरी है कि यह कौशल आधारित खेल हैं या सिर्फ किस्मत का खेल, यानि ये महज जुआ या सट्टेबाजी है।

स्मार्ट फोन, सस्ता मोबाइल डेटा और आसान डिजिटल भुगतान आदि से ऑनलाइन गेमिंग उद्योग बड़ी तेजी से बढ़ा है और ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2022 के आखिर तक भारत में यह रफ्तार और बढ़ेगी। चूँकि फैंटेसी गेमिंग को लेकर कोई स्पष्ट नियामक निर्देश नहीं हैं, इसलिए इन कंपनियों पर नकेल कसना आसान काम भी नहीं है। हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने इस दिशा में कदम उठाये हैं। तेलंगाना, असम, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और नागालैंड ने ऐसे ऑनलाइन खेलों पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगाया हुआ है।

किंतु कर्नाटक सरकार द्वारा इस सम्बन्ध में लाये गए कानून पर अदालत ने रोक लगा दी। अदालत द्वारा यह कहा गया कि फैंटेसी गेमिंग कौशल आधारित है, इसलिए इसे जुआ नहीं कहा जा सकता। इससे पहले माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी ऑनलाइन स्पोर्ट्स की वैधता के बारे में ऐसी ही राय व्यक्त की गई थी।

चीन में पाबंदी

चीन ने कम उम्र के बच्चों को वीडियो गेम्स की लत से दूर रखने के लिए नियम लागू किया है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे रात के 10 बजे से सुबह 8 बीच ऑनलाइन गेम्स नहीं खेल सकेंगे। इसके साथ ही खेल की समय अवधि पर भी लगाम कसी गई है। छुट्टियों और सप्ताहांत को अधिकतम तीन घंटे और सप्ताह के दौरान अधिकतम 90 मिनट तक ही खेल सकते हैं। चीन की  सरकार ने इसके साथ ही पूरे महीने में 200 युआन से अधिक खर्च करने पर भी पाबंदी लगाई है। दक्षिण कोरिया और जापान आदि देशों में भी कुछ पाबंदियां लगायी गई हैं, ताकि बच्चे वीडियो गेम्स पर ज्यादा समय बर्बाद नहीं करें।

भारत में कैसे लगे लगाम?

ऑनलाइन गेमिंग उद्योग भारत में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है और ऐसा माना जाता है कि भारत दुनिया के पांच शीर्ष मोबाइल गेमिंग बाजारों में से एक है। ऐसा अनुमान है कि भारत में करीब दो करोड़ लोग ऑनलाइन गेम खेलते हैं। कुछ शीर्ष कंपनियों के आकलन इस ओर इशारा करते हैं कि भारतीय गेमिंग उद्योग वर्ष 2025 तक बढक़र 500 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जो कि वर्तमान में 1.5 करोड़ डॉलर के करीब बताया जाता है।

ऑनलाइन गेमिंग के क्षेत्र में युवाओं और बच्चों से जुड़े स्वास्थ्य, मनोदशा और आर्थिक अपराधों में लिप्त होने की आशंका जैसे गंभीर मुद्दे तो सामने हैं ही, इस उद्योग में लाखों उपभोक्ताओं की भागीदारी और अरबों, करोड़ों रुपये का लेनदेन भी एक अहम बिन्दु है। ऑनलाइन खेलों में करोड़ों रुपये की हेरा-फेरी के मामले भी सामने आये हैं, लेकिन इनसे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी नहीं मिल पायी है। इस उद्योग के जरिये काले धन को सफेद बनाने और चरमपंथी गतिविधियों के लिए धन मुहैया करवाने जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार इसे धन शोधन निवारण अधिनियम के दायरे में ला सकती है।

वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक नियामक ढाँचे की जरूरत बताई है। ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉम्र्स यदि धन शोधन निवारण कानून के तहत आ जाएं तो कंपनियों को उपभोक्ताओं का विवरण (केवाईसी) प्राप्त करना जरूरी होगा।

केवाईसी दिशा-निर्देश

फेडरेशन ऑफ इंडियन फैंटेसी स्पोर्ट्स, जो ड्रीम 11 द्वारा स्थापित एक स्वयं नियामक उद्योग संस्था है, यह सुनिश्चित करती है कि 18 साल से कम उम्र के खिलाड़ी इन ऐप्स का उपयोग नहीं कर सकते। खेलने वालों को केवाईसी दिशा-निर्देशों का पालन भी जरूरी है, ताकि खेलने वालों की पहचान की जा सके और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और डिजिटल बैंकिंग सुविधा धारक लोग ही इन ऐप्स पर खेल सकें। वैसे ऐप्स पर नजर रखने वाले लोग कहते हैं कि अधिकतर गेमिंग एप्स पर केवाईसी की पड़ताल कोई जरूरी नहीं होती। इसकी जरूरत तभी है, जब ऐप के खाते में से पैसा निकालना हो।

चूँकि भारत में गेमिंग पर कानून बनाना राज्य सूची में आता है, इसलिए अलग-अलग राज्यों ने अपने हिसाब से कानून बनाये हैं जो बाद में अदालत द्वारा निरस्त कर दिए गए। कर्नाटक ने गेमिंग पर प्रतिबन्ध लगाना उचित समझा तो मेघालय ने गेमिंग क्षेत्र का नियमन बेहतर माना। दरअसल पूरे देश में एक सार्वभौम नियामक ढाँचे की जरूरत है। मेघालय रेगुलेशन ऑफ गेमिंग एक्ट 2021 में कौशल आधारित गेमिंग और किस्मत के खेल दोनों को ही शामिल किया गया है और पूरे देश के लिए बनने वाले नियम कानून में इस विषय पर स्पष्टता बहुत ही जरूरी है। वरना गेमिंग को सिर्फ कौशल का खेल समझने की आड़ में करोड़ों लोगों की किस्मत डूब जायेगी। 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.