दहेज उत्पीड़नः दो माह आरोपियों की न हो गिरफ्तारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैवाहिक मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद दो महीने के ‘कूलिंग पीरियड’ तक नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई नहीं की जाएगी। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी ने मुकेश बंसल, उनकी पत्नी मंजू बंसल और बेटे साहिब बंसल की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।

कोर्ट ने कहा, इस ‘कूलिंग पीरियड’ के दौरान मामले को तत्काल परिवार कल्याण समिति के पास भेजा जाएगा और केवल वही मामले इस समिति के पास भेजे जाएंगे, जिनमें आईपीसी की धारा 498 ए (दहेज के लिए उत्पीड़न) और ऐसी अन्य धाराएं लगाई गई हैं, जहां 10 वर्ष से कम की जेल की सजा है, मगर महिला को कोई चोट नहीं पहुंचाई गई है।

अदालत ने अपने निर्णय में सास मंजू और ससुर मुकेश के खिलाफ आरोप हटाने की याचिका स्वीकार कर ली, लेकिन पति साहिब बंसल की याचिका खारिज कर दी और उसे सुनवाई के दौरान निचली अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, जब संबद्ध पक्षों के बीच समझौता हो जाए तो जिला और सत्र न्यायाधीश एवं जिले में उनके द्वारा नामित अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के पास आपराधिक मामले को खत्म करने सहित मुकदमे को खत्म करने का विकल्प होगा।

अदालत ने कहा, यह आमतौर पर देखने में आता है कि प्रत्येक वैवाहिक मामले को कई गुना बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है, जिसमें पति और उसके सभी परिजनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए जाते हैं। आजकल यह धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे हमारा सामाजिक ताना बाना बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। अदालत ने कहा, महानगरों में लिव इन रिलेशनशिप हमारे पारंपरिक विवाहों की जगह ले रहा है। वास्तव में दंपति, कानूनी पचड़ों में पड़ने से बचने के लिए इसका सहारा ले रहे हैं। यदि भादंवि की धारा 498-ए का इसी तरह से दुरुपयोग होता रहा तो सदियों पुरानी हमारी विवाह की व्यवस्था पूरी तरह से गायब हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि हापुड़ की रहने वाली शिवांगी बंसल ने दिसंबर, 2015 में साहिब बंसल से विवाह किया और 22 अक्टूबर, 2018 को उसने हापुड़ के पिलखुआ पुलिस थाना में अपने पति और ससुराल के अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 498-ए, 504, 506, 307 और 120-बी समेत अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई।

मामले की गहराई से जांच के बाद पुलिस ने केवल 498-ए, 323, 504, 307 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया। यही नहीं, आरोप पत्र से उसके देवर चिराग बंसल और ननद शिप्रा जैन का नाम हटा दिया गया। शिवांगी अप्राकृतिक मैथुन, बलपूर्वक गर्भपात कराने के आरोपों को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। साहिब बंसल और शिवांगी बंसल के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए शिवांगी के सास ससुर ने उनसे अलग होकर एक किराये के मकान में रहना शुरू कर दिया था और वे अपने बेटे और बहू के साथ महज एक वर्ष चार महीने ही रहे।

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