गहलोत का भाई पर अब सीबीआई का छापा

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के घर और दुकान पर आज फिर सीबीआई ने छापा मारा। अग्रसेन गहलोत पर आरोप है कि 2007 से 2009 के बीच फर्टिलाइजर बनाने के लिए जरूरी पोटाश किसानों में बांटने के नाम पर सरकार से सब्सिडी पर खरीदी और इसे निजी कंपनियों को बेचकर मुनाफा कमाया।

भाई अग्रसेन के यहां पड़े छापे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा- मैंने तो उल्टा टाइम मांगा था। सीबीआई, ईडी और आयकर प्रमुखों से 13 जून को मिलने का टाइम मांगा। 15 जून को मुकदमा दर्ज हो गया और 17 जून को छापा पड़ गया। क्या अप्रोच है? यह समझ से परे है। मैं राहुल गांधी से ईडी पूछताछ के विरोध में प्रदर्शन में शामिल होता हूं, तो इसका बदला मेरे भाई से क्यों लिया जा रहा है? उनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उनके परिवार का कोई सदस्य राजनीति में नहीं है। यह समझ से परे है कि पिछले साल ईडी और अब सीबीआई उनके यहां पहुंच गई। उन्होंने कहा, जितने ज्यादा लोगों को तंग करेंगे, उतना ज्यादा बैकलेश इनके लिए होगा। भाई के बहाने खुद पर दबाव बनाने के सवाल पर गहलोत ने कहा- 50 साल से मैं राजनीति कर रहा हूं, क्या तो डराएंगे-धमकाएंगे, जो कल राजनीति में आए हैं। इनकी अभी रगड़ाई भी नहीं हुई है, क्योंकि ये बड़े-बड़े पदों पर बिना रगड़ाई के आ गए।

अग्रसेन गहलोत पर इस मामले की जांच ईडी की जांच पहले से चल रही है।  कस्टम विभाग ने अग्रसेन की कंपनी पर करीब 5.46 करोड़ रुपए की पेनल्टी भी लगाई थी। अग्रसेन की अपील पर हाईकोर्ट ने ईडी से जुड़े मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। अब इस मामले में सीबीआई ने जांच शुरू की है।

अग्रसेन के ठिकाने पर शुक्रवार सुबह यकायक सीबीआई की टीम पहुंची। उस समय अग्रसेन घर पर ही थे। सीबीआई टीम में पांच अधिकारी दिल्ली और पांच अधिकारी जोधपुर से हैं। फिलहाल टीम के सदस्य जांच में जुटे हैं। अंदर किसी को प्रवेश नहीं दिया गया है। एक टीम के अग्रसेन की पावटा स्थित दुकान पर भी पहुंचने की सूचना है।

ईडी के अधिकारियों के अनुसार अग्रसेन गहलोत की कंपनी अनुपम कृषि, म्यूरियेट ऑफ पोटाश फर्टिलाइजर पर बैन के बावजूद उसके निर्यात में शामिल थी। एमओपी को इंडियन पोटाश लिमिटेड आयात कर किसानों को सब्सिडी पर बेचती है।

अग्रसेन गहलोत आईपीएल के ऑथराइज्ड डीलर थे। 2007 से 2009 के बीच उनकी कंपनी ने सब्सिडाइज्ड रेट पर एमओपी खरीदा, लेकिन उसे किसानों को बेचने की बजाय दूसरी कंपनियों को बेच दिया। उन कंपनियों ने एमओपी को इंडस्ट्रियल सॉल्ट के नाम पर मलेशिया और सिंगापुर पहुंचा दिया।

डायरेक्ट्रोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने 2012-13 में फर्टिलाइजर घोटाले का खुलासा किया था। कस्टम विभाग ने अग्रसेन की कंपनी पर करीब 5.46 करोड़ रुपए की पेनल्टी भी लगाई थी। भाजपा ने 2017 में इसे मुद्दा बनाया। यह मामला अब फिर से चर्चा में आ गया है।

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