बार-बार डिजिटल इमरजेंसी क्यों ?

उदयपुर मर्डर के बाद गहलोत सरकार ने राजस्थान में इंटरनेट बैन कर एक प्रकार से डिजिटल इमरजेंसी लगा दी है। इससे लगता है कि आम आदमी के सारे अधिकार सस्पेंड कर दिए गए हैं।

उदयपुर मामले में पुलिस की विफलता सामने आ चुकी है, लेकिन उसकी सजा आम लोगों को इंटरनेट बंद करके दी जा रही है। पिछले दो दिन से राजस्थान वासी डिजिटल कैद झेल रहे हैं। नेटबंदी के नाम पर सरकार ने मौलिक अधिकार छीन लिए हैं।

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट की जनवरी 2020 में एक मामले में कहा था कि इंटरनेट संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है। लिहाजा इंटरनेट को अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता। मगर राजस्थान में ये पहली बार नहीं है, जब राज्य सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए इंटरनेट बंदी को हथियार बना रही है। पेपर लीक नहीं रोक पाते तो इंटरनेट बंद। इंटेलिजेंस फेल्योर के कारण करौली, जोधपुर में दंगे होते हैं तो इंटरनेट बंद। कश्मीर के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा इंटरनेट बंद होता है।

राजस्थान में 6.28 करोड़ मोबाइल इंटरनेट यूजर्स हैं। अलग-अलग कंपनियों के इंटरनेट प्लान का औसत निकाला जाए तो 1 दिन का इंटरनेट का खर्च होता है 10 रुपए। इस हिसाब से इन यूजर्स को 2 दिन में 120 करोड़ का नुकसान हो चुका है। राज्य में इंटरनेट बंद होने से डेबिट, क्रेडिट कार्ड भुगतान सिस्टम, ई वॉलेट ट्रांजेक्शन, मूवी टिकट बुकिंग, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन टैक्सी सर्विस, ऑनलाइन होम डिलीवरी, ऑनलाइन फूड ऑर्डर, पानी, बिजली के बिल जमा, ऑनलाइन शॉपिंग, होटल बुकिंग, फ्लाइट बुकिंग, रेल यात्रा बुकिंग, कार्ड स्वाइप मशीन, ऑनलाइन मॉन्यूमेंट बुकिंग, मनी ट्रांसफर सहित 30 से ज्यादा सेवाएं चार दिन से बंद हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय का इस मामले में कहना है कि प्रदेश में लोगों की सुरक्षा तथा साम्प्रदायिक सद्भाव को ध्यान में रखकर नेटबंदी का निर्णय लिया जाता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संभागीय आयुक्त स्थानीय माहौल देखकर नेटबंदी का निर्णय ले रहे हैं। लीजलाइन एवं ब्रॉडबेंड पर इंटरनेट की सेवाएं यथावत चालू हैं, जिससे आवश्यक सेवाएं बाधित नहीं हो रही हैं। उधर, मध्य प्रदेश में भी हाल ही में हुए दंगे में इंटरनेट 1 मिनट के लिए भी बंद नहीं किया गया। वहां खरगोन में 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस के दौरान दंगा भड़का। शहर में तीन दिन कर्फ्यू रहा। इसके बाद ईद पर भी कर्फ्यू लगाया, लेकिन एक भी दिन इंटरनेट बंद नहीं किया गया।

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