100 करोड़वीं बच्ची को मिले वादे हुए काफूर

देश की आबादी का आंकड़ा 100 करोड़ पहुंचाने वाली दिल्ली के नजफगढ़ की सामान्य परिवार में जन्मी आस्था अरोड़ा, नेताओं के बड़े-बड़े वादों को भूल खुद के दम पर अपना मुकाम हासिल करने में जुटी है। देश की ‘बिलियंथ बेबी’ के जन्म लेते ही देश की जनसंख्या 100 करोड़ हो गई। उसका जन्म सफदरजंग अस्पताल में 11 मई 2000 को सुबह 5:05 मिनट पर हुआ था। पैदा होते ही तत्कालीन महिला व बाल विकास मंत्री सुमित्रा महाजन उससे मिलने अस्पताल पहुंची थीं।

आस्था दुनिया में आना राष्ट्रीय स्तर की खबर बन गया था। परिवार के लोग भी काफी खुश थे कि उनकी बेटी सबसे खास है। अस्पताल में उसे देखने के लिए कई बड़े-बड़े नेता आए। सुमित्रा महाजन ने उसे गोद में उठाया और आशीर्वाद देते हुए मुफ्त शिक्षा सुलभ कराने का वादा किया। वादे के अनुसार आस्था को जीवनभर मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और मुफ्त यात्रा भी मिलनी थी। मगर आज सारे वादे हवा हो गए हैं।

आस्था बताती है, मैं बड़ी हुई तो पिताजी ने मंत्रालय के चक्कर लगाए। उनसे कहा गया कि आपके पास कोई भी लिखित कागजात नहीं हैं, इसलिए आपकी बेटी को कोई फायदा नहीं मिल सकता। मेरे पैदा होने पर जितने भी वादे किए गए थे, वे सब जुबानी जमाखर्च निकले। मुझे किसी भी किस्म का कोई फायदा आज तक नहीं मिला है। पापा ने शुरू में 1-2 बार बात करने की कोशिश की, फिर जब कुछ नहीं हुआ तो वो भी अपने काम में लग गए।

वह जब बड़ी हुई तो मेडिकल फील्ड में जाने का फैसला लिया। पढ़ाई के लिए ज्यादा पैसे नहीं थे इसलिए 5 लाख का शिक्षा लोन लेकर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। वर्तमान में आस्था ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में नर्सिंग बीएससी में ग्रेजुएशन कर रही है। यह उसका फाइनल ईयर है। वह पढ़ाई पूरी कर जल्द से जल्द किसी अस्पताल में नौकरी कर लोन चुकाना चाहती है।

हालांकि बिलियंथ बेबी होने पर यूएन पॉपुलेशन फंड की तरफ से आस्था के बैंक खाते में दो लाख रुपए का फिक्सं डिपॉजिट किया गया था। उसी पैसे से अब वह अपनी हॉस्टल व अन्य फीस भर रही है।

बिलियंथ बेबी के अनुसार जब वह स्कूल गई तो वहां लोगों को पता था कि वह 100 करोड़वीं बच्ची है। बचपन में उसके दोस्त ये जानकर बड़े खुश होते थे। आज भी कॉलेज में उसके कई साथियों को ये बात पता है। जिनको नहीं पता, उनको आस्था के इंटरव्यू देने पर पता लग जाता है। आज उसे सभी जानते हैं, लेकिन सेलिब्रिटी जैसा कुछ नहीं है। जब भी जनसंख्या नियंत्रण पर कोई कार्यक्रम होता है तो वह उसमें शामिल होकर अपने विचार रखती रहती है।

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