धनकड़ ने दाखिल किया नामांकन

एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे। विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार रहेंगी। छह अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए वोटिंग होगी। नामांकन की आखिरी तिथि 19 जुलाई है।

इस मौके पर एनडीए के उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने कहा, मैं किसान के घर में पैदा हुआ हूं, कक्षा 6 में पढ़ने के लिए 6 किमी पैदल गया, स्कॉलरशिप के जरिए आगे की पढ़ाई किया और आज साधारण किसान का बेटा नामांकन दाखिल करके आया है। मैं पीएम का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे ये अवसर दिया।

एक न्यूज एजेंसी के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने नामांकन दाखिल करने से पहले उनका समर्थन कर रहे सांसदों से मुलाकात की। केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को आगामी 6 अगस्त को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है। अगर वह निर्वाचित होते हैं, तो इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर पहुंचने वाले राजस्थान के दूसरे नेता होंगे।

राजस्थान से इससे पहले भैरों सिंह शेखावत देश के उपराष्ट्रपति रहे हैं. उन्होंने अगस्त 2002 से जुलाई 2007 तक भारत के 11वें उपराष्ट्रपति के रूप में पद संभाला. धनखड़ मूल रूप से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के हैं. भैरों सिंह शेखावत भी उसी शेखावाटी से थे. जिसमें सीकर, झुंझुनू और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के आसपास के इलाके शामिल हैं.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में अपनी मौजूदा भूमिका से पहले 71 वर्षीय धनखड़ एक प्रसिद्ध वकील रहे हैं। उन्होंने राजस्थान में जाट समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले धनखड़ समाजवादी पृष्ठभूमि के रहे हैं और वह पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।

धनखड़ का उपराष्ट्रपति चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। देश के उपराष्ट्रपति को चुनने के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। संसद में सदस्यों की मौजूदा संख्या 780 है, जिनमें से केवल भाजपा के 394 सांसद हैं। जीत के लिए 390 से अधिक मतों की आवश्यकता होती है.।

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