रेवडी कल्चर पर अंकुश जरूरी, बनाएं विशेषज्ञ निकाय

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में चुनावी वादों के रेवड़ी कल्चर को खत्म करने में सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा है कि यह एक गम्भीर मुद्दा है। चुनाव आयोग और सरकार इससे पल्ला नहीं झाड़ सकते और ये नहीं कह सकते कि वे कुछ नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार और चुनाव आयोग इस पर रोक लगाने के लिए विचार करे।

देशभर में चुनाव से पहले लगभग हर राजनीतिक पार्टियां जनता को अपने पाले में करने के लिए कई तरह के लोकलुभावन ऐलान करती हैं। खास कर हर चीज़ मुफ्त में बांटने का प्रचलन सा चल पड़ा है। इसे ही पीएम मोदी के हाल के एक भाषण के बाद से ‘रेवड़ी कल्चर’ कहा जाने लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने फ्री-बी मतलब ‘रेवड़ी कल्चर से निपटने के लिए एक विशेषज्ञ निकाय बनाने की वकालत की। कोर्ट ने कहा कि इसमें केंद्र, विपक्षी राजनीतिक दल, चुनाव आयोग, नीति आयोग, आरबीआई और अन्य हितधारकों को शामिल किया जाए। साथ ही निकाय में फ्री-बी पाने वाले और इसका विरोध करने वाले भी शामिल हों। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह मुद्दा सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर असर डालता है। इस मामले को लेकर एक हफ्ते के भीतर ऐसे विशेषज्ञ निकाय के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। अब इस मामले पर दायर जनहित याचिका की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।

वोट दे कर सरकार बनाने के एवज में फ्री में जनता को सामान देने का वादा करने वाली पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली यह याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है। उनके वकील विकास सिंह ने बताया कि ये कैसे देश, राज्य और जनता पर बोझ बढ़ाता है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इससे वोटर की अपनी राय डगमगाती है। ऐसी प्रवृत्ति से हम आर्थिक विनाश की ओर बढ़ रहे हैं। मेहता ने कहा, सैद्धांतिक तौर पर हम इस याचिका का समर्थन करते हैं। इस साल जनवरी में प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने केंद्र और चुनाव आयोग दोनों से इस मामले को लेकर जवाब मांगा था।

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