बीस जिलों की गायें लंपी वायरस की चपेट में

राजस्थान के 33 में से 20 जिलों में लंपी वायरस फैल चुका है। मतलब, प्रदेश के 60 प्रतिशत हिस्से में गायें इस वायरस की चपेट में हैं। इस वायरस से 90 प्रतिशत गायें और 10 प्रतिशत भैंस ग्रस्त हैं। इसबीच, केन्द्रीय पशुपालन व मत्स्य पालन मंत्री डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि केन्द्र की ओर से इसको लेकर टीकाकरण कराया जा रहा है लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।

राजस्थान में हर दिन सैकड़ों गायें मर रही हैं, लेकिन इसका पुख्ता आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। गोशालाओं से हर शाम निकायों की गाड़ी में गायों की अंतिम यात्रा निकल रही है। कई जिले तो ऐसे हैं, जहां गायों के इलाज की मूलभूत सुविधा तक नहीं है। कहीं धूप, नीम के पत्तों के रस से गायों का इलाज किया जा रहा है तो कहीं पशुपालक झाड़-फूंक के भरोसे हैं। कई जगह लोगों ने गायों को गोशाला में भेज दिया है।

कोई भी पशु इस वायरस से प्रभावित होता है तो 7 दिन में लक्षण दिखने शुरू होते हैं। संक्रमित होने के बाद पशु खाना-पीना भी छोड़ देता है। पहले गायों की स्किन, फिर रक्त और बाद में दूध पर असर पड़ता है। वायरस इतना खतरनाक है कि इंफेक्ट होने के 15 दिन के भीतर तड़प-तड़पकर गायों की मौत हो जाती है।

राजस्थान से सटे पश्चिमी इलाकों से सबसे पहले वायरस फैलना शुरू हुआ था। वेटरनरी डॉक्टर भींवाराम ने बताया कि राजस्थान में गायों की चार नस्लों गिर, राठी, थारपारकर व देशी पर लंपी वायरस का सबसे ज्यादा असर हो जा रही है। अब तक कई जिलों में किए गए सर्वे में इन नस्लों की गायें ही सबसे ज्यादा संक्रमित मिली। मौतों का आंकड़ा भी इन्हीं नस्लों का सबसे ज्यादा है। खास बात है कि अमरीकन नस्ल की एचएफ क्रॉस बीड पर लंपी वायरस का असर नहीं है। क्योंकि इसकी देशी बीड से इम्यूनिटी अच्छी होती है। ये वायरस भी अमरीकन है।

देश की सबसे बड़ी गौशालाओं में शामिल जयपुर की हिंगोनिया में भी वायरस की एंट्री हो चुकी है। हालांकि, यहां अब तक किसी गौवंश की मौत नहीं हुई है, लेकिन यहां 30-40 गायों में संक्रमण की जानकारी आई है। संक्रमित गायों को अलग बाड़ा बनाकर रखा गया है। वर्तमान में गौशाला के 54 बाड़ों में 14 हजार से ज्यादा गौवंश है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंपी का कारण कैप्रिपॉक्स वायरस है। कोई भी पशु इस वायरस से प्रभावित होता है तो 7 दिन बाद धीरे-धीरे शरीर कमजोर पड़ने लगता है। पशु खाना पीना छोड़ देता है। वायरस सबसे पहले स्किन, फिर ब्लड और अंत में दूध पर असर डालता है। दूध कम हो जाता है।

वायरस फैलने का बड़ा कारण मक्खियां व मच्छर हैं। इन्हीं के कारण लंपी बीमारी एक से दूसरे पशु में फैल रही है। क्योंकि जब किसी पशु में वायरस फैल जाता है तो पहले उसकी त्वचा पर नर्म गांठे बन जाती है। ये गांठें धीरे-धीरे फूटने लगती है। इनसे सफेद पानी रिसने लगता है। फिर इन्हीं घावों पर मक्खी और मच्छर बैठने लगते हैं। ये मक्खी-मच्छर दूसरे पशु पर भी बैठते हैं और वो भी इंफेक्ट हो जाता है।

इधर, केन्द्रीय मंत्री बालियान ने बताया कि केन्द्र सरकार ने पिछले सप्ताह भी एक टीम राजस्थान भेजी थी। अभी सोमवार से केन्द्रीय टीम राजस्थान में डटी हुई है। उन्होंने कहा, राजस्थान सरकार से हमने टीकाकरण के लिए आवश्यक प्रस्ताव भिजवाने को कहा है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार से हमें किसी प्रकार का प्रस्ताव नहीं मिला है। राज्य सरकार जैसे ही प्रस्ताव बनाकर भेजेगी केन्द्र सरकार की तरफ से बजट स्वीकृत कर टीकाकरण शुरू कर दिया जायेगा।

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