पेड़ से 28 घंटे बाद उतारा साधु का शव

राजस्थान में जालोर जिले के राजपुरा गांव में एक साधु के 28 घंटे से पेड़ पर लटते शव को शनिवार सुबह उतारा गया। साधु ने रविनाथ महाराज ने भीनमाल के भाजपा विधायक पूराराम चौधरी पर आश्रम का रास्ता बंद करने का आरोप लगाकर अपने आश्रम में लगे पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी थी। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने शव को पेड़ से उतारना चाहा, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए। आश्रम के साधु और ग्रामीण मांग कर रहे थे कि संत का सुसाइड नोट सार्वजनिक किया जाए। करीब 28 घंटे बाद प्रशासन ने उनकी शर्त मांनी और शव को पेड़ से उतारा।

राजपुरा गांव के हनुमान आश्रम के साधु रविनाथ महाराज (60) ने गुरुवार देर रात आश्रम में सुसाइड कर लिया था। शव शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे उतारा गया। इससे पहले शुक्रवार रात को करीब आठ बजे विधायक पूराराम चौधरी सहित तीन लोगों के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहने व धमकाने का मामला दर्ज किया गया।

आश्रम और सुंधा माता सड़क के बीच विधायक पूराराम चौधरी की 20 बीघा जमीन है, जिसपर चौधरी का रिजॉर्ट प्रस्तावित है। जमीन करोड़ों की बताई जा रही है। पिछले दो दिनों से इस जमीन की पैमाइश करवाई जा रही थी। बताया जा रहा है रास्ता बंद होने व विधायक की दादागिरी से परेशान संत रविनाथ ने सुसाइड कर लिया।

जसवंतपुरा एसडीएम राजेंद्र सिंह ने आज बताया कि हमने आश्रम तक रास्ता देने की बात मान ली है। प्रशासन और साधु-संतों के बीच बनी सहमति के बाद श्री बाला हनुमान जी आश्रम तक जाने के लिए प्रशासन आधिकारिक तौर पर रास्ता देगा। आश्रम व सड़क के बीच विधायक की ओर से खुदवाई गई खाई को रेती से भरा जाएगा। जसवंतपुरा थानाधिकारी मनीष सोनी ने बताया कि संत के भतीजे बाबूराम ने विधायक पूराराम चौधरी, ड्राइवर धनसिंह व बीजनाथ उर्फ छोगाराम के खिलाफ साधु को धमकाने, जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित करने और मारपीट करने का मामला दर्ज कराया है। मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

दिवंगत साधु रविनाथ महाराज का वास्तविक नाम वगताराम मेघवाल निवासी पंसेरी (जालोर) है। उनकी पत्नी का नाम काली बाई है। बच्चे नहीं होने पर 20 साल पहले दोनों ने संन्यास ले लिया। पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण पत्नी काली बाई का देहांत हो गया था।

उल्लेखनीय है कि करीब 17 दिन पहले भरतपुर के पसोपा गांव में संत बाबा विजय दास ने अवैध खनन के विरोध में खुद को आग लगा ली थी। वे साधु-संतों के साथ पिछले 551 दिन से आंदोलन कर रहे थे।

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